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SOUTH CENTRAL RAILWAY
PRESS RELEASE
PUBLIC RELATIONS OFFICE, SECUNDERABAD - 500 071
No.19/2022-2308-04-2022
secunderabad
पीआर सं. 19 दमरे ने वर्ष 2021-22 के दौरान रिकॉर्ड 859 मार्ग किलोमीटर के लिए 'कवच' संस्थापित किया

-यह एक वित्तीय वर्ष में कवच - भारत की स्वदेशी स्वचालित गाड़ी सुरक्षा प्रणाली की अब तक की सबसे अधिक संस्थापना है.

-अब दक्षिण मध्य रेलवे ने पर 1,445 मार्ग किलो मीटर के लिए कवच संस्थापित किए.

भारतीय रेल की अत्याधुनिक स्वदेश में विकसित स्वचालित गाड़ी सुरक्षा प्रणाली अर्थात् कवच को दक्षिण मध्य रेलवे जोन में कुल 1,445 मार्ग किलोमीटर (आरकेएम) के लिए संस्थापित किया गया है. कवच भारत के माननीय प्रधान मंत्री "आत्मानिर्भर भारत" की पहल को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है. पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान कवच के तहत दमरे का कुल 859 मार्ग किमी नेटवर्क शामिल किया गया है. यह वित्तीय वर्ष में जोन द्वारा परियोजना के आरंभ होने से लेकर अब तक का सबसे अच्छा कार्य निष्पादन है.

'कवच' को भारतीय उद्योग के सहयोग से अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित किया गया है. दक्षिण मध्य रेलवे विकास के बाद से इसके कार्यान्वयन के साथ निकटता से जुड़ी हुई है और भारतीय रेल पर गाड़ी परिचालन में संरक्षा के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए परीक्षण की सुविधा प्रदान कर रही है. कवच का अर्थ गाड़ियों को खतरे की स्थिति में सिगनल पार करने (एसपीएडी) (अर्थात लाल-रोक सिगनल) से रोकने और टक्कर से बचाने के लिए सुरक्षा प्रदान करता है. यदि चालक गति प्रतिबंधों के अनुसार गाड़ी को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो यह गाड़ी ब्रेक सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय कर देता है. इसके अलावा, यह कार्यात्मक कवच प्रणाली से लैस दो गाड़ियों / इंजनों के बीच टक्कर को रोकता है.

विकास चरण के दौरान, दक्षिण मध्य रेलवे के वाडी-विकाराबाद-सनतनगर और विकाराबाद-बीदर सेक्शन पर 25 स्टेशनों को कवर करते हुए 264 किलोमीटर की लंबाई के लिए कवच लागू किया गया था. बाद में, 2020-21 के दौरान, 32 स्टेशनों को कवर करते हुए अतिरिक्त 322 किलोमीटर के लिए इसे संस्थापित किया गया था. पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 में 77 स्टेशनों को कवर करते हुए अतिरिक्त 859 किलोमीटर में प्रणाली को लागू किया गया है. इसके साथ, कवच का संचयी स्थापन 133 स्टेशनों, 29 समपार फाटकों और 74 इंजनों को कवर करते हुए 1,445 किलोमीटर (स्वचालित सिग्नल व्यवस्था के 68 मार्ग किलोमीटर सहित) तक पहुंच गया है. इसके अंतर्गत आने वाले सेक्शन हैं - मनमाड - मुदखेड - निजामाबाद - सीताफलमंडी - कुर्नूल - गुंतकल (सिकंदराबाद और गुंतकल स्टेशनों को छोड़कर); परभणी-बीदर-विकाराबाद-वाडी और वाडी-सनतनगर.

कवच की मुख्य विशेषताएं:

गाड़ियों/लोकोमोटिव को खतरे की स्थिति में  सिगनल पार करने से रोकना (एसपीएडी).

ड्राइवर मशीन इंटरफेस (डीएमआई) / लोको पायलट परिचालन सह संकेत इंडिकेशन पैनल (एलपीओसीआईपी) में सिगनल पहलुओं के प्रदर्शन के साथ संचलन प्राधिकरण को निरंतर अद्यतन करना.

ओवर स्पीडिंग की रोकथाम के लिए स्वचालित ब्रेक लगाना.

समपार फाटकों के पास पहुंचते समय सीटी  स्वतः बजना.

कार्यात्मक कवच से लैस दो इंजनों के बीच टक्कर को रोकना.

आपातकालीन स्थितियों के दौरान एसओएस संदेश.

नेटवर्क मॉनिटर सिस्टम के माध्यम से गाड़ी की गतिविधियों की केंद्रीकृत लाइव निगरानी

श्री अरुण कुमार जैन, महाप्रबंधक (प्रभारी), दमरे ने परियोजना के आरंभ होने से लेकर अबतक  क्षेत्रीय और मंडल दोनों स्तरों पर सिगनल और दूरसंचार अधिकारियों और कर्मचारियों के उत्कृष्ट कार्य निष्पादन कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना की है. उन्होंने कहा कि अगले चरण में, कवच प्रणाली का विस्तार कुछ और सेक्शनों में किया जाएगा, जिससे जोन के बड़े हिस्से को कवच नेटवर्क के अंतर्गत लाया जाएगा.




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