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कर्षण वितरण


                                                                   कर्षण वितरण (31.07.2021 को)

  • उद्धेश्य

    कर्षण वितरण का उद्धेश्य माल गाड़ी और पैसेंजर गाडी सेवाओं के सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल परिचालन उपलब्ध करना है.

  • हमारे बारे में

दक्षिण मध्य रेलवे पर विद्युतीकरण कार्य 1980 में विजयवाडा – गुडूर सेक्शन के विद्युतीकरण से आरंभ हुआ है. जुलाई 2021 के समापन तक दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद, हैदराबाद, विजयवाडा, गुंतकल, गुंटूर और नांदेड छह मंडलो पर 4,014 मार्ग किलोमीटर और 9,032 रेलपथ किलोमीटर तक विद्युतीकरण पूरा हो गया है. दक्षिण मध्य रेलवे में कुल 6,294 मार्ग किलोमीटर के रेलपथ पर 4,014 मार्ग किलोमीटर अर्थात कुल रेलपथ का 64% विद्युतीकृत हो गया है.

विद्युत विभाग के इस विंग द्वारा निम्नलिखित कार्यों का रखरखाव किया जाता है

 
  • मंडलवार विद्युतीकरण (31.07.2021 को)

मंडल

दमरे पर कुल मार्ग किमी (बीजी)

कुल विद्युतीकृत मार्ग किमी (बीजी)

कुल विद्युतीकृत रेलपथ किमी (बीजी)

सिकंदराबाद

1557

1190

2953

विजयवाडा

1061

926

2410

गुंतकल

1452

1153

2543

गुंटूर

675

629

946

हैदराबाद

694

82

168

नांदेड

855

35

39

कुल

6294

4014

9059

 

  • दक्षिण मध्य रेलवे पर विद्युतीकृत सेक्शन

  • विजयवाडा गुडूर

  • विजयवाडा- विशाखपट्टणम

  • विजयवाडाभीमवरम टाउन

  • गुडिवाडामचिलीपट्टणम

  • सामलकोटकाकिनाडा पोर्ट

  • विजयवाडा- काजीपेटबलहारशा

  • डोर्नकल- कारेपल्लीसिंगरेनी कोलियरीभद्राचलममणुगुरु

  • पेद्दपल्लीलिंगमपल्ली जगित्यालमोरथाड

  • काजीपेट- सिकंदराबाद- हैदराबादसनतनगरविकाराबादवाडी

  • विकाराबादकोहीर

  • माणिकगढ़गढचंदूर

  • मोटुमर्रीजग्गयापेटमेल्लचेरुवुजमपहाडविष्णुपुरम

  • गुडूर- रेणिगुंटातिरुपतिपाकालकाटपाडी

  • रेणिगुंटागूटीगुंतकलवाडी

  • गूटी-धर्मवरम

  • गूटीपेडेकल्लू

  • गुंतकलकल्लुरु

  • गुंतकलबेल्लारी

  • धर्मवरमकदिरि

  • कृष्ण केनाल- गुंटूरनल्लपाडुढोनगुंतकल

  • गुंटूरतेनालीरेपल्ले

  • नल्लपाडुनडिकुडिपगिडिपल्ली

  • नडिकुडिमाचेर्ला

  • ओबुलावारीपल्लीकृष्णपट्टणम पोर्ट

  • सनतनगर- लिंगमपल्लीमल्टि मोडल परिवहन के अंतर्गत

  • तेल्लापुररामचंद्रापुरममल्टि मोडल परिवहन के अंतर्गत

  • घटकेसर मौला-अली 3री और 4थी लाइनमल्टि मोडल परिवहन के अंतर्गत

  • सिकंदराबादफलकनुमा - उमदानगरमल्टि मोडल परिवहन के अंतर्गत

  • सिकंदराबादमलकाजगिरि – मेडचल मल्टि मोडल परिवहन के अंतर्गत

  • मेडचल – मनोहराबाद

  • अकोला – लोहगढ़

  • दक्षिण मध्य रेलवे पर चल रहे विद्युतीकरण कार्य .

  • एमएमटीएस फेज – II (मौला-अली सनतनगर)

  • भीमवरम टाउननिडदवोलु और भीमवरम – नरसापुर

  • उमदानगर – महबूबनगर

  • पाकालकदिरि

  • नंद्याल – येर्रगुंट्ला

  • गद्वाल – रायचूर

  • पूर्णा – लोहगढ़

  • मनमाड – मुदखेड – निजामाबाद – मनोहराबाद (जनकमपेट – बोधन सहित)

  • मोरथाडनिजामाबाद

  • महबूबनगर ढोन

  • पिंपलकुट्टी – मुदखेड

  • परभणी – परली वैजनाथ

  • कोहीरपरली वैजनाथ

 

  • विद्युत कर्षण वितरण कार्य प्रणाली

राज्य के ग्रिड से प्राप्त विद्युत सप्लाई 220/132 केवी, 2 फेज पर ली जाती है और कर्षण सब-स्टेशनों पर 25 केवी, सिंगल फेज तक स्टेप डाउन की जाती है. इस 25 केवी सिंगल फेज सप्लाई को ओवर हेड कंडक्टर प्रणाली में फीड किया जाता है जिसमें फ्लेक्सिबल ड्रॉपर द्वारा कैटेनरी वायर से सस्पेंड ग्रूव्ड कॉन्टैक्ट वायर होती है.लोकोमोटिव के पैंटोग्राफ पैन और कॉन्टैक्ट वायर के नीचे के बीच लगातार स्लाइडिंग संपर्क होता है. लोकोमोटिव का पेंटोग्राफ जब उठाया जाता है तो संपर्क तार पर 7.0 किग्रा / सेमी² का दबाव पडता है जो ओवर हेड कंडक्टर से लोकोमोटिव तक करंट का निरंतर और सुचारू निर्वाह सुनिश्चित करता है.

25 केवी की आपूर्ति को स्टेप डाउनकर सुधारा जाता है तथा ट्रैक्शन मोटर्स में फीड किया जाता है. रिटर्न करंट लोको व्हील्स के माध्यम से पटरियों में और पटरियों से ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर के अर्थ टर्मिनल तक प्रवाहित होता है और इस प्रकार सिंगल फेज इलेक्ट्रिक सर्किट को पूरा करता है. जैसे-जैसे पटिरयों की अर्थिंग की जाती है, यह सुनिश्चित किया जाता है कि रिटर्न करंट की क्षमता, अर्थ की क्षमता से अधिक न बढ़े. इससे यह सुनिश्चित होता है कि विद्युतीकृत पटरियों के संपर्क में आने वाले लोगों को बिजली का कोई खतरा नहीं है. लोकोमोटिव की गति इनपुट वोल्टेज को कर्षण मोटर में घट-बढ कर इंजन की गति को घटाया या बढाया जा सकता है.

  • तकनीकी सुधार

  • नए विद्युतीकृत सेक्शनों में कर्णष सब-स्टेशनों (टीएसएस) पर 21.6/30.24 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध कराए गए हैं. इन ट्रांसफार्मरों की क्षमता को फ़ोर्स्ड एयर सर्कुलशन पंखे को स्विच आन करते हुए 21.6 एमवीए से 30.24 एमवीए तक बढाई जा सकती है.

  • कर्षण सब स्टेशनों (टीएसएस) पर अत्याधुनिक एसएफ6 /वैक्यूम प्रकार के स्विच गियर होते है. इन स्विच गियरों को पहले इस्तेमाल किए जाने वाले तेल स्विच गियर की तुलना में कम रखरखाव की आवश्यकता होती है.

  • ओएचई पावर सप्लाई में खराब सर्किट ब्रेकर ट्रिपिंग और परिणामी रुकावटों से बचने के लिए कर्षण सब स्टेशनों (टीएसएस) में डिस्टेंस प्रोटेक्शन रिले के बेहतर वर्शन का प्रावधान किया गया है.

  • माल गाड़ियों की ढलान सेक्शन में रूकौनी से बचने के लिए ओएचई में पीटीएफई टाइप शॉर्ट न्यूट्रल सेक्शन का प्रावधान है.

  • प्रमुख यार्डों में हस्त चालित आइसोलेटरों को ओएचई के खराब सेक्शन के त्वरित पृथ्थकरण की सुविधा और ब्रेकडाउन/असामान्य घटनाओं के दौरान गाड़ियों की मेन लाइनों में रूकौनी से बचने के लिए मोटर चालित किया गया है.

  • संपर्क रहित रिमोट सेंसिंग डिवाइस का उपयोग कर्षण सब स्टेशनों (टीएसएस) / स्विचिंग स्टेशनों के ओएचई जंपर, बसबार आदि के संयोजक से संबंधित हॉट स्पॉट की पहचान करने और खराबियों से पहले मरम्मत की योजना बनाने के लिए किया जाता है.

  • फ्लैश ओवर और परिणामी इन्सुलेटरों की खराबी से बचने के लिए प्रदूषित क्षेत्र में स्थित ओएचई के लिए लंबे क्रीपेज इंसुलेटरों का प्रावधान है.

  • जहां ओएचई बदमाशों/चरवाहों द्वारा पथराव किए जाने की संभावना हो वहां हाइब्रिड इंसुलेटर का प्रावधान है.

  • ओएचई को बिजली आपूर्ति में होने वाली रुकावट को कम करने के लिए सभी फीडर सर्किट ब्रेकरों के लिए हाई स्पीड ऑटो रिक्लोजर का प्रावधान है.

  • विद्युतचुंबकीय प्रकार के रिले के स्थान पर संख्यात्मक रिले का प्रावधान है.

  • एससीएडीए की प्रमुख विशेषताएं

  • सिकंदराबाद, विजयवाडा, गुंतकल, गुंटूर और हैदराबाद पर निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं वाले पीसी आधारित कंप्यूटर रिमोट नियंत्रण प्रणाली संस्थापित की गई है.

  • पूरी रेलवे लाइन पर सब स्टेशनों और स्विचिंग स्टेशनों में स्थित सर्किट ब्रेकर, इंटरप्टरों के सभी परिचालनों को मंडल नियंत्रण कार्यालय से कीबोर्ड/माउस के माध्यम से आसान कमांडों का उपयोग कर रिमोट से परिचालित किया जा सकता है.

  • विभिन्न उपकरणों की स्थिति, वोल्टेज और करंट की वैल्यू को परिचालक कार्यस्टेशनों पर लगाए गए वीडियो मॉनिटर पर प्रदर्शित किया जाता है और इसकी निरंतर निगरानी की जाती है.

  • यदि ओएचई में खराबी हो तो इसे एससीएडीए प्रणाली द्वारा ऑटोमेटिक फॉल्ट ऑइसोलेशन किया जाता है.

  • टीपीसी के सभी परिचालन और गतिविधियों को प्रणाली में स्वचालित रूप से लॉग इन किया जाता है.

  • संरक्षा

  • सभी कर्षण मास्ट और संरचनाओं को उचित रूप से अर्थिंग किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की पावर लीकेज के कारण विद्युत शॉक की संभावना से बचा जा सके. अर्थ संरचनाओं के साथ पर्याप्त क्लियरेंस और अनुरक्षण किया जाता है. ओएचई से दो मीटर की कार्यचालन दूरी बनाए रखीजाता है.

  • विद्युतीकृत सेक्शन में सुरक्षित यात्रा करने के लिए ‘”जनताद्वारा अपनाए जाने वाले कुछ संरक्षा सुझाव नीचे दिए गए हैं:

  • ऊपरी उपस्कर सक्रिय कंडक्टरों के आसपास किसी खड़े लंबे खंभों / कोई अन्य वस्तुओं को न ले जाया जाए.

  • पटरियों को न छुएं / उन पर न चलें .

  • सवारी डिब्बों, वैगनों के छत पर यात्रा न करें क्योंकि उपरी उपस्कर सक्रिय कंडक्टर घातक होते है.

  • आपकी संरक्षा के लिए विद्युतीकृत स्टेशन यार्डों में अतिचार करने की सख्त मनाही है.

  • ऊपरी पैदल पुलव/ऊपरी सड़क पुल से किसी भी धातु के हिस्से को सक्रिय तारों और कंडक्टरों की ओर प्रोजेक्ट न करें.

  • ऊपरी सड़कपुल / ऊपरी पैदल पुल पर से उपरी उपस्कर तारों और कंडक्टरों पर पानी न डालें.

  • चलती गाड़ी के कंपार्टमेंट से बाहर न लटकें.

  • समपार फाटकों से गुजरने वाले सड़क वाहनों के छत पर बैठकर यात्रा न करें.

  • गेज स्तर की ऊंचाई से अधिक परेषण के साथ समपार फाटकों से गुजरने की कोशिश न करें.

  • यह न भूलें कि ऊपरी कर्षण तार हमेशा सक्रिय और खतरनाक होती हैं.

    




Source : दक्षिण मध्‍य रेलवे CMS Team Last Reviewed : 25-11-2022  


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