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SOUTH CENTRAL RAILWAY
PRESS RELEASE
PUBLIC RELATIONS OFFICE, SECUNDERABAD - 500 071
No.177/2020-2131-05-2021
Secunderabad
राष्ट्र को 21392 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा पहुंचाया गया.

राष्ट्र को 21392 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा पहुंचाया गया.

313 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों से पूरे देश में ऑक्सीजन पहुंचाया है.

अब तक 1274 टैंकरों से भरे लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा पहुंचाया और 15 राज्यों को राहत पहुंचाई है.

2000 मीट्रिक टन के लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सुपुर्दगी प्रत्यके रूप से हरियाणा और कर्नाटक में किया गया.

महाराष्ट्र में 614 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 656 मीट्रिक टन, दिल्ली में 5476 मीट्रिक टन, हरियाणा में 2023 मीट्रिक टन, राजस्थान में 98 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 2115 मीट्रिक टन, उत्तराखंड में 320 मीट्रिक टन, तमिलनाडु में1808 मीट्रिक टन, आंध्र प्रदेश में 1738 मीट्रिक टन, पंजाब में 225 मीट्रिक टन, केरल में 380 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 1858 मीट्रिक टन, झारखंड में 38 मीट्रिक टन और असम में 240 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई गई है.

सभी बाधाओं को पार करते हुए और नए समाधान खोजने के लिए, भारतीय रेलवे ने देश भर के विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाकर राहत देने की अपनी यात्रा जारी रखा है. अब तक, भारतीय रेलवे ने देश भर के विभिन्न राज्यों में 1274 से अधिक टैंकरों में 21392 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाया है.

उल्लेखनीय यह है कि अब तक 313 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने अपनी यात्रा पूरी कर विभिन्न राज्यों को राहत पहुंचाई है.

इस रिलीज के समय तक, 23 टैंकरों में 406 एमटी से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के साथ 5 लोडेड ऑक्सीजन एक्सप्रेस चल रही है.

हरियाणा और कर्नाटक में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सुपुर्दगी प्रत्येक 2000 मीट्रिक टन को पार कर गई.

तमिलनाडु और तेलंगाना राज्य के लिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सुपुर्दगीप्रत्येक 1800मीट्रिक टनको पार कर गई.

ध्यान देने की बात है कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 36 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 मीट्रिक टन भार के साथ अपनी सुपुर्दगी शुरू की थी.

यह भारतीय रेलवे का प्रयास है कि अनुरोध करनेवाले राज्यों को यथासंभव कम से कम समय में अधिक से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाएगा.

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम जैसे 15 राज्यों तक ऑक्सीजन राहत पहुंचाई गई.

इस रिलीज के समय तक, महाराष्ट्र में 614 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 656 मीट्रिक टन, दिल्ली में 5476 मीट्रिक टन, हरियाणा में 2023 मीट्रिक टन, राजस्थान में 98 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 2115 मीट्रिक टन, उत्तराखंड में 320 मीट्रिक टन, तमिलनाडु में 1808 मीट्रिक टन, आंध्र प्रदेश में 1738 मीट्रिक टन, पंजाब में 225 मीट्रिक टन, केरल में 380 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 1858 मीट्रिक टन, झारखंड में 38 मीट्रिक टन और असम में 240 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई जा चुकी है.

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों द्वारा देश भर के 15 राज्यों के लगभग 39 शहरों/कस्बों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को पहुंचाया है, जैसे उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, ताड़ीपत्री और विशाखापट्टणम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नै, टूटीकोरिन, कोयंबतूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची.

भारतीय रेलवे ने ऑक्सीजन आपूर्ति स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की किसी भी उभरती जरूरत को पूरा करने के लिए खुद को तैयार रखता है. लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन लाने के लिए राज्य अपने टैंकर भारतीय रेलवे को प्रदान करें.

पूरे देश भर में, भारतीय रेलवे ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा, मुंद्रा और पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटानगर, अंगुल जैसे स्थानों से ऑक्सीजन लिया है और फिर इसे उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम राज्यों में जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्यों में पहुंचा रहा है.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऑक्सीजन राहत सबसे तेज समय में पहुंचे, रेलवे ने ऑक्सीजन एक्सप्रेस मालगाड़ियों के संचालन में नए मानक और अभूतपूर्व बेंचमार्क बनाए है. लंबी दूरी के ज्यादातर मामलों में इन महत्वपूर्ण मालगाड़ियों की औसत गति 55 से ऊपर है. उच्च प्राथमिकता वाले ग्रीन कॉरिडोर पर चल रहे हैं, उच्चतम अत्यावश्यकता के साथ, विभिन्न क्षेत्रों की परिचालन टीमें सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऑक्सीजन सबसे तेज संभव समय सीमा में पहुंचे। विभिन्न वर्गों में क्रू परिवर्तन के लिए तकनीकी ठहराव को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है.

ऑक्सीजन एक्सप्रेस आगे बढ़ने के लिए पटरियों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जाने की सुनिश्चित किया जा रहा है.

अन्य माल ढुलाई की गति कम न होते हुए इन सबका इस तरह से योजना बनाई जाती है.

नई ऑक्सीजन का चलना एक बहुत ही गतिशील अभ्यास है और आंकड़े हर समय अपडेट होते रहते हैं. अधिक भरी हुई ऑक्सीजन एक्सप्रेस के रात में अपनी यात्रा शुरू करने की उम्मीद है.





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