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SOUTH CENTRAL RAILWAY
PRESS RELEASE
PUBLIC RELATIONS OFFICE, SECUNDERABAD - 500 071
No.217/2020-2118-06-2021
Secunderabad
भारतीय रेल को स्पेक्ट्रम आबंटन और रेल परिचालन में सर्वतोमुखी संरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक सिगनल साधनों का प्रावधान


मानव त्रुटि के कारण होने वाली गाडी टक्कर निवारण करने और गति क्षमता बढ़ाने में अधिक सिगनल बैंडविथ उपलब्ध कराना; पहले चरण में महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल करते हुए 37300 मार्ग किलोमीटर के लिए गाड़ी टक्कर बचाव प्रणाली को मंजूरी दी गई है.


भारतीय रेल को अब तक 2221 रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) होने से संवर्धन मिला है

इसके अलावा, अगले 3 वर्षों में 1550 ईएल उपलब्ध कराने की योजना है

वर्तमान पर अधिक गाडियों को चलाने की क्षमता से उच्च घनत्व वाले मार्गों को बढ़ावा मिलता है; 3447 रूट किमी  पर स्वचालित ब्लॉक सिगनल व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है.

मिशन मोड में लगभग 15000 रूटकिमी उच्च घनत्व और माल ढुलाई गहन मार्गों पर स्वचालित सिगनल व्यवस्था की योजना बनाई गई है


समपारों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए; भारतीय रेलवे 11705 समपार फाटकों पर सिगनल के साथ इंटरलॉकिंग उपलब्ध कराई गई है

सरकार ने स्टेशनों और गाड़ियों में सार्वजनिक संरक्षा और सुरक्षा सेवाओं के लिए भारतीय रेल को 700 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आबंटन को मंजूरी दी है.


भारतीय रेलवे का 92% मार्ग ओएफसी आधारित प्रणाली (62,205 मार्ग किमी) के साथ कवर किया गया है

सिगनल और दूरसंचार के उपरोक्त आधुनिकीकरण के लिए, भारतीय रेलवे ने लगभग 55,000 करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की है

सिगनल प्रणाली गाड़ी परिचाचलन में संरक्षा बढ़ाती है. भारतीय रेल में उपयोग में आने वाले उपस्करों का उन्नयन और प्रतिस्थापन एक सतत प्रक्रिया है और इसे उसकी स्थिति, परिचालनिक आवश्यकताओं और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर किया जाता है.

गाड़ी परिचालन में संरक्षा को और बेहतर बनाने और अतिरिक्त लाइन क्षमता उत्पन्न करने के लिए, सिगनल प्रणाली के आधुनिकीकरण को आरंभ किया गया है जिसमें निम्न शामिल हैं -

1.संरक्षा और लचीलापन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) का प्रावधान – गाड़ी परिचालन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के लाभ प्राप्त करने और संरक्षा बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है. अब तक दिनांक 30.04.2021 तक 2221 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें भारतीय रेल का 34% हिस्सा शामिल है. भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रदान करने के लिए भी नीतिगत निर्णय लिया गया है. इसके अलावा, अगले 3 वर्षों में 1550 ईआई प्रदान करने की योजना है. इससे गाड़ी परिचालन की संरक्षा और दक्षता में वृद्धि होगी.

2. लाइन क्षमता बढ़ाने के लिए स्वचालित ब्लॉक सिगनल व्यवस्था (एबीएस) - भारतीय रेल के मौजूदा उच्च घनत्व वाले मार्गों पर अधिक गाड़ियां चलाने हेतु लाइन क्षमता बढ़ाने के लिए, स्वचालित ब्लॉक सिगनल व्यवस्था एक लागत प्रभावी समाधान है. 30.04.2021 तक, 3447 मार्ग किमी पर स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रदान की गई है। भारतीय रेलवे ने लगभग 15000 रूटकिमीउच्च घनत्व और माल ढुलाई गहन मार्गों पर स्वचालित सिगनल व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है. मिशन मोड में रोल आउट की योजना है. स्वचालित सिगनल व्यवस्था के कार्यान्वयन से, क्षमता में वृद्धि होगी जिसके परिणामस्वरूप अधिक गाड़ियां चलाना संभव हो सकेंगा.

3. समपार फाटकों पर संरक्षा - समपार फाटकों पर संरक्षा बढ़ाना चिंता का एक प्रमुख विषय रहा है. सिगनल के साथ समपारों को इंटरलॉक करने से संरक्षा बढ़ जाती है. 30.04.2021 तक भारतीय रेलवे ने समपारों पर संरक्षा बढ़ाने के लिए 11705 समपार फाटकों पर सिगल के साथ इंटरलॉकिंग प्रदान की है.

4. स्वचालित गाड़ी संरक्षा (एटीपी) प्रणाली मानव त्रुटि को रोकने के लिए लोको पायलट की सहायक- दुनिया में उन्नत रेलवे प्रणाली द्वारा एटीपी प्रणाली का उपयोग लोको पायलटों के सहायक के रूप में किया जा रहा है. ये प्रणाली लोको पायलट द्वारा हुई मानवीय त्रुटि के कारण टक्कर को रोकती हैं. संरक्षा में सुधार के लिए, अब मिशन मोड में भारतीय रेल (आईआर) पर एटीपी प्रणाली प्रदान करने का निर्णय लिया गया है. अब तक भारतीय रेल एटीपी प्रणाली के लिए विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भर थी. भारतीय फर्मों के साथ भारतीय रेलवेने अब सफलतापूर्वक एटीपी के लिए स्वदेशी लागत प्रभावी तकनीक विकसित की है – जिसे गाड़ी टक्कर बचाव प्रणाली (टीसीएएस) कहा जाता है. माननीय प्रधान मंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन के तहत टीसीएएस को भारत की राष्ट्रीय एटीपी के रूप में अपनाने का निर्णय लिया गया है. पहले चरण में महत्वपूर्ण मार्गों को कवर करते हुए 37300 मार्ग किलोमीटर के लिए टीसीएएस को मंजूरी दी गई है. टीसीएएस के लागू होने से मानवीय त्रुटि के कारण गाड़ी की टक्कर समाप्त हो जाएगी और भारतीय रेल की गति क्षमता में वृद्धि होगी जिससे यात्रा में लगने वाला समय कम होगा.

यह नोट किया जाए कि 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने स्टेशनों और गाड़ियों में सार्वजनिक संरक्षा और सुरक्षा सेवाओं के लिए भारतीय रेलवे को 700 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आबंटन को मंजूरी दी है.

इस स्पेक्ट्रम के साथ, भारतीय रेलवे ने अपने मार्ग पर लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) आधारित मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार प्रदान करने की परिकल्पना की है.

परियोजना में अनुमानित निवेश 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है. यह परियोजना अगले 5 साल में पूरी की जाएगी.

यह रेलवे के परिचालन और अनुरक्षण व्यवस्था में एक रणनीतिक बदलाव लाएग. यह मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अधिक गाड़ियों को समायोजित करने के लिए संरक्षा में सुधार और लाइन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी. आधुनिक रेल नेटवर्क के परिणामस्वरूप परिवहन लागत कम होगी और दक्षता अधिक होगी. साथ ही, यह 'मेक इन इंडिया' मिशन को पूरा करने और रोजगार पैदा करने के लिए विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए बहुराष्ट्रीय उद्योगों को आकर्षित करेगी.

भारतीय रेल के लिए एलटीई का उद्देश्य रेलवे के परिचालन, संरक्षा और सुरक्षा अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय वॉयस, वीडियो और डेटा संचार सेवाएं प्रदान करना है. इसे निम्न के लिए उपयोग में लाया जाएगा:

स्वचालित गाड़ी संरक्षा के साथ आधुनिक कैब आधारित सिगनल प्रणाली की व्यवस्था जो गाड़ी परिचालन में संरक्षा और थ्रूपुट को बढ़ाएगी. इसके अलावा यहकोहरे के दौरान भी मदद करेंगी.

ड्राइवर,गार्ड,स्टेशन मास्टर,गाड़ी यातायात नियंत्रक और अनुरक्षण कर्मचारियों के बीच गाड़ीपरिचालन में निर्बाध कनेक्टिविटी के साथ मिशन क्रिटिकल वॉयस कम्युनिकेशन.

यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए गाड़ियों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सीमित वीडियो निगरानी (लाइव फीड) की मानीटरी.

आईओटी आधारित एसेट, रोलिंग स्टॉक मॉनिटरिंग के लिए विशेष रूप से.

गाडियों और स्टेशनों पर यात्री सूचना प्रणाली (पीआईएस).

एलटीई पहल के अलावा, रेलवे दूरसंचार की अन्य प्रमुख कदम हैं:

6002 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा का विस्तार किया गया है और शेष व्यवहार्य स्टेशनों को जल्द ही कवर किया जाएगा जिसमें से 70% स्टेशन ग्रामीण क्षेत्र के हैं. इस सुविधा का उपयोग यात्रियों,स्थानीय विक्रेताओं,कुली आदि द्वारा किया जा रहा है.

सुरक्षा में सुधार के लिए 801स्टेशनों पर सीसीटीवी लगाए गए हैं और शेष पर लगाने की योजना बनाई जा रही है.

रेलवे के 92% मार्ग को ओएफसी आधारित प्रणाली (62,205 मार्ग किमी) में शामिल किया गया है. इसका उपयोग रेलवे के आंतरिक संचार के लिए किया जा रहा है और अतिरिक्त क्षमता का आरसीआईएल द्वारा व्यावसायिक रूप से उपयोग किया जा रहा है.

भारतीय रेल ई-फाइलिंग प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू कर रही है. प्रशासनिक कार्यों में सुधार के लिए सभी मंडलों, जोनों, सीटीआई और पीयू सहित185इकाइयों में ई-ऑफिस उपलब्ध कराया गया है. 1.35 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इसका उपयोग कर रहे हैं और अब तक 15.0लाख से अधिक ई-फाइलें बनाई जा चुकी हैं. मौजूदा भौतिक फाइलों को डिजिटल फाइलों में बदला जा रहा है.

सिगनल और दूरसंचार के उपरोक्त आधुनिकीकरण के लिए, भारतीय रेलवे ने लगभग 55,000 करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की है.





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