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SOUTH CENTRAL RAILWAY
PRESS RELEASE
PUBLIC RELATIONS OFFICE, SECUNDERABAD - 500 071
No.285/2021-2213-07-2021
Secunderabad
भारत और नेपाल के बीच रेल कार्गो आवाजाही को बढ़ावा


भारत के भीतर भारतीय रेल नेटवर्क पर माल-लदान करने वाले सभी प्रकार के वैगन कार्गो अब नेपाल तक और नेपाल से भी माल-लदान कर सकते हैं.

भारत और नेपाल ने भारत-नेपाल रेल सेवा समझौते (आरएसए) 2004 के लिए विनिमय पत्र (एलओई) पर हस्ताक्षर किए.

उदारीकरण से विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और कुछ अन्य उत्पादों पर परिवहन लागत कम होगी जिनका लदान विशेष वैगनों में किया जाता है.

भारतीय रेल मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार भारतीय रेल नेटवर्क पर नेपाल रेलवे कंपनी के स्वामित्व वाले वैगनों को भी नेपाल में जाने वाले सामग्रियों को ले जाने के लिए अधिकृत किया जाएगा (कोलकाता/हल्दिया से विराटनगर/बीरगंज मार्गों पर आने और जाने वाली).

विनिमय पत्र (एलओई) के लागू होने के साथ ही, सभी अधिकृत कार्गो ट्रेन ऑपरेटर जिनमें सार्वजनिक और निजी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर, ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर, विशेष माल ट्रेन ऑपरेटर या भारतीय रेलवे द्वारा अधिकृत कोई अन्य ऑपरेटर शामिल हैं, भारतीय रेल नेटवर्क का उपयोग नेपाल के कंटेनर और अन्य माल लदान - भारत और नेपाल दोनों के बीच द्विपक्षीय या भारतीय बंदरगाहों द्वारा तीसरे देश से नेपाल तक कर सकेंगे.

यह "पड़ोसी पहले" नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के भारत के प्रयासों में एक और मील का पत्थर है.

भारतीय रेल नेटवर्क का उपयोग करने के लिए प्राधिकरण लागू होने के साथ ही भारत और नेपाल के बीच रेल परिवहन को आज बढ़ावा मिला, अबसभी कार्गो ट्रेन ऑपरेटर नेपाल के लिए सभी कंटेनरों को ले जाने के लिए भारतीय रेल नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगे, चाहे वह भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय माल लदान हो या किसी तीसरे देश से भारतीय बंदरगाहों द्वारा नेपाल तक माल लदान हो. यह उदारीकरण नेपाल में रेल द्वारा माल लदान सेगमेंट में बाजार को बल देगातथा इससे दक्षता और लागत-प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होने की संभावना है, यह नेपाली उपभोक्ताओं के लिए भी लाभकारी होगा.

इन कार्गो ट्रेन ऑपरेटरों में सार्वजनिक और निजी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर, ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर, विशेष माल ट्रेन ऑपरेटर या भारतीय रेल द्वारा अधिकृत कोई अन्य ऑपरेटर शामिल हैं.

यह भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच शब्दशः नोट और विनिमय पत्र की हस्ताक्षरित प्रतियों के औपचारिक आदान-प्रदान के बाद दि.09.07.2021 से लागू हो गया.

इस विनिमय पत्र (एलओई) के बाद, सभी श्रेणियों के वैगनों में सभी प्रकार के कार्गो जो भारत के भीतर भारतीय रेल नेटवर्क पर माल लदान कर सकते हैं, वे नेपाल के लिए भी माल लदान कर सकेंगे.

इस कदम से ऑटोमोबाइल और कुछ अन्य उत्पादों के लिए परिवहन लागत में कमी आएगी, जिनका लदान विशेष वैगनों में किया जाता है.

भारतीय रेल मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार भारतीय रेल नेटवर्क पर नेपाल रेलवे कंपनी के स्वामित्व वाले वैगनों को भी नेपाल में जाने वाले सामग्रियों को ले जाने के लिए अधिकृत किया जाएगा (कोलकाता/हल्दिया से विराटनगर/बीरगंज मार्गों पर आने और जाने वाली).

इस विनिमय पत्र पर हस्ताक्षर "पड़ोसी पहले" नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के भारत के प्रयासों में एक और मील की पत्थर है.

भारत की ओर से, समारोह का नेतृत्व श्री संजय कुमार मोहंती, सदस्य (परिचालन और व्यवसाय विकास), रेल मंत्रालय ने किया. नेपाल की ओर से, इसका नेतृत्व श्री दिनेश भट्टराई, सचिव वाणिज्य, उद्योग और आपूर्ति मंत्रालय ने किया, इस समारोह में रेल मंत्रालय, भारतीय दूतावास, काठमांडू, उत्तर मंडल, विदेश मंत्रालय, भारत तथा नेपाली विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशिया डिविजडन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे.

रेल सेवा समझौता (आरएसए) - 2004 और विनिमय पत्र (एलओई) की पृष्ठभूमि.

1.रेल सेवा समझौते को दि.21.05.2004 कोरेल मंत्रालय, भारत सरकार तथा उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय (अब वाणिज्य मंत्रालय), और नेपाल की महामहिम सरकार (अब नेपाल सरकार) के बीच मालगाड़ी सेवाएं आरंभ करने के लिए दोनों देशों के बीच रक्सौल (भारत) के रास्ते बीरगंज (नेपाल) के लिए निष्पादित किया गया था. यह एक समझौता है जो रेल द्वारा भारत और नेपाल के बीच आवाजाही का मार्गदर्शन करता है. इस समझौते का औचित्य यह है कि इससे पहले दोनों देशों के बीच कोई रेल आवाजाही नहीं थी. इसलिए परिचालन और वाणिज्यिक पहलुओं तथा रेल द्वारा कार्गो के लिए सीमा शुल्क क्लीयरेंस की प्रक्रिया हेतु एक रूपरेखा की आवश्यकता थी. अब तक बड़े पैमाने पर विभिन्न विकास हुए हैं जिनके लिए रेल सेवा समझौते में बदलाव की आवश्यकता है.

2.रेल सेवा समझौता (आरएसए) के अनुच्छेद 1.4 में एक प्रावधान है कि "हर पांच वर्ष में समझौते की समीक्षा की जाएगी तथा अनुबंध करने वाले पक्षों द्वारा आपसी सहमति से इसे संशोधित किया जा सकता है.

3रेल सेवा समझौता (आरएसए) के प्रासंगिक लेखों में संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए, दोनों पक्षों द्वारा विनिमय पत्र (एलओई) पर हस्ताक्षर किए जाते हैं. अतीत में, तीन अवसरों पर विनिमय पत्र (एलओई) के माध्यम से रेल सेवा समझौता (आरएसए) में संशोधन किया गया. रेल सेवा समझौता (आरएसए) -2004 में पहला ऐसा संशोधन 21 मई, 2004 को विनिमय पत्र (एलओई) पर हस्ताक्षर करके किया गया था. दूसरे विनिमय पत्र (एलओई) जिसमें नए सीमा शुल्क प्रक्रिया की शुरूआत की आवश्यकता थी, पर 17 दिसंबर, 2008 को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कार्गो की शुरूआत के समय हस्ताक्षर किए गए थे तथा तीसरे विनिमय पत्र (एलओई) पर 19/20.02.2016 को हस्ताक्षर किए गए थे, जो कोलकाता/हल्दिया बंदरगाह के माध्यम से मौजूदा रेल परिवहन के प्रावधान के अलावा विशाखापट्टणम बंदरगाह तक/से रेल परिवहन यातायात को सक्षम बनाता है.

यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान विनिमय पत्र (एलओई) को नेपालसरकार द्वारा 28 जून, 2021 को अंतिम रूप दिया गया और सरकार द्वारा हस्ताक्षरित किया गया जिसे रेल मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा दि.29.06.2021 को विनिमय पत्र (एलओई) पर हस्ताक्षर करके स्वीकार किया गया. यह शब्दशः नोट और एलओई की हस्ताक्षरित प्रतियों के औपचारिक आदान-प्रदान के बाद दि.09.07.2021 से लागू होता है.





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