Screen Reader Access Skip to Main Content Font Size   Increase Font size Normal Font Decrease Font size
Indian Railway main logo
खोज :
Find us on Facebook   Find us on Twitter Find us on Youtube View Content in English
National Emblem of India

हमारे बारे में

नागरिक चार्टर

रेलगाड़ियां तथा समय

यात्री सेवाएं / भाड़ा जानकारी

सार्वजनिक सूचना

निविदाएं

हमसे संपर्क करें

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व
स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत
मुख्यालय
हैदराबाद मंडल
सिकंदराबाद डिवीजन
गुंतकल मंडल
गुंटूर मंडल
नांदेड़ मंडल
विजयवाड़ा मंडल
प्रेस विज्ञप्ति
बिल स्थिति
आवेदन और बिल की स्थिति
महत्वपूर्ण सूचनाएं
परिणाम और अधिसूचना
सर्वेक्षण और निर्माण
रेलवे कर्मचारियों के लिए
विक्रेताओं के लिए पंजीकरण पालसी
अन्य जानकारियां
वेंडरों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
डाउनलोड
प्रक्रिया और आवेदन पत्र
खेल कोटे के तहत नियुक्ति
स्काउट एवं गाइड कोटा के तहत नियुक्ति
Appointment under Scouts & Guides Quota
सांस्कृतिक कोटा के तहत नियुक्ति
चिकित्सा विभाग
विलंब शुल्क और घाट - भाड़ा की माफी
वाणिज्यिक शाखा
व्यय ठेके के लिए ठेकेदारों / आपूर्तिकर्ता / विक्रेताओं के पंजीकरण के लिए दिशानिर्देश एवं निर्देश
मुख्य चिकित्सा निदेशक कार्यालय, दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद में मेडिकल फार्मास्युटिकल कंपनियों का पंजीकरण
दक्षिण मध्य रेलवे के साथ स्वास्थ्य देखभाल के लिए निजी अस्पतालों का पंजीकरण
शिकायत दर्ज करें
गाड़ी दुर्घटना के बारे में जन सूचना
गाड़ी दुर्घटना जांच रिपोर्ट
गाड़ी दुर्घटना जांच रिपोर्ट
पुरानी सूचनाएं
 
Bookmark Mail this page Print this page
QUICK LINKS
   

SOUTH CENTRAL RAILWAY
PRESS RELEASE
PUBLIC RELATIONS OFFICE, SECUNDERABAD - 500 071
PR No.278/2022-2328-06-2022
SECUNDERABAD
पीआर सं.278 - श्री अश्विनी वैष्णव ने वाणिज्य अर्जन, गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) अनुबंधों के लिए ई-नीलामी नीति और पोर्टल का शुभारंभ किया

भारत में किसी भी स्थान के बोली लगाने-वाले को पोर्टल के माध्यम से भारतीय रेल की किसी भी क्षेत्रीय इकाई की नीलामी में भाग लेने के लिए केवल एक बार पंजीकरण करने की आवश्यकता है

रेलवे ने पिछले एक माह के दौरान, 80 पायलट अनुबंधों को सामूहिक रूप से अंतिम रूप दिया

जिससे128 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ

अखिल भारतीय स्तर पर पात्रता की शर्तों का मानकीकरण

 

भारतीय रेल ने रद्दी बिक्री की वर्तमान ई-नीलामी के अनुरूप, भारतीय रेलवे-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (आईआरईपीएस) के माध्यम से वाणिज्य अर्जन और गैर-किराया राजस्व अनुबंधों को इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के दायरे में लाने के लिए कदम उठाया है. श्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में वाणिज्य अर्जन, गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) अनुबंधों के लिए ई-नीलामी का शुभारंभ किया. इससे न केवल रेलवे का अर्जन बढ़ेगा बल्कि व्यवसाय को सुगम बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी बल मिलेगा.

 

इस अवसर श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “यह नीति माननीय प्रधान मंत्री के आम आदमी के अनुभव को प्रौद्योगिकी के उपयोग में बदलने के दृष्टिकोण के अनुरूप है. इस नई नीति के आने से, निविदा की कठिन प्रक्रिया सरल हो जाएगी. साथ ही, यह युवाओं को ई-नीलामी प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगी. यह नीति जीवन को आसान बनाएगी, पारदर्शिता को बढ़ावा देगी और रेलवे में डिजिटल इंडिया पहल में एक और उपलब्धि होगी."

 

अर्जन परिसंपत्तियां: पार्सल वैन, सशुल्क शौचालय, स्टेशन परिचरण क्षेत्र और कोचों पर विज्ञापन का अधिकार, वातानुकूलित विश्राम कक्ष, अमानती सामान घर, पार्किंग लॉट, प्लास्टिक बॉटल क्रशर, एटीएम, स्टेशन को-ब्रैंडिंग, मांग पर विषय संबंधी वीडियो स्क्रीन आदि. इन परिसंपत्तियों को एक बार पोर्टल में स्थान-वार मैप किया जाएगा जिसेप्रणाली हमेशा याद रखेगी कि अर्जन के लिए इसे शामिल किया गया है या नहीं. इससे वास्तविक समय के आधार पर परिसंपत्ति की निगरानी में सुधार होगा और परिसंपत्ति-निष्क्रियता में कमी आएगी.

वर्तमान प्रणाली: वर्तमान ई-निविदा में भागीदारी के लिए संबंधित क्षेत्र इकाई के साथ भौतिक रूप से पंजीकरण की आवश्यकता है. इससे भारत के शेष स्थानों से संभावित बोली लगानेवालों के लिए भाग लेना मुश्किल होता है. निविदा समिति के सदस्यों की भौतिक रूप से बैठक की आवश्यकता के कारण इसे अंतिम रूप देने में अधिक समय लगता है.

ई-नीलामी: भारत में कहीं से भी बोली लगानेवाले को पोर्टल के माध्यम से भारतीय रेलवे की किसी भी क्षेत्र इकाई की नीलामी में भाग लेने के लिए एक बार स्वयं पंजीकरण करने की आवश्यकता है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बयाना (ईएमडी) जमा करने के बाद संपत्ति के प्रबंधन अधिकारों के लिए दूर-दराज से बोली लगाई जा सकती है. सफल बोलीदाता बहुत कम समय में ऑनलाइन और ई-मेल के माध्यम से स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं. वित्तीय टर्नओवर की आवश्यकता को छोड़कर, सभी पात्रता मानदंड हटा दिए गए हैं. इसके अलावा, वित्तीय आवश्यकताओं में काफी हद तक छूट दी गयी है. 40 लाख रुपये तक के वार्षिक अनुबंध के लिए कोई वित्तीय टर्नओवर की आवश्यकता नहीं है.

पायलट रन :9 जोनों के 11 मंडलों में पायलट रन आरंभ किया गया : पायलट रन के दौरान 128 करोड़ के कुल मूल्य के कुल 80 अनुबंधों को अंतिम रूप दिया गया.

 

पायलट रन के दौरान प्राप्त सफलताएं :

1.दिनांक 04 जून 2022 को अहमदाबाद मंडल द्वारा 2 लॉट यथा गांधीधाम जंक्शन और हिम्मतनगरपार्किंग के लिए ई-नीलामी आयोजित की गयी. गांधीधाम जंक्शन (जीआईएमबी) के लिए 24 बोलियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें से सबसे अधिक 12,60,000 (प्रति वर्ष) की है जो परंपरागत बोली मूल्य से 38% अधिक है. हिम्मतनगर के लिए 26 बोलियां प्राप्त हुईं हैं, जिनमें से सबसे अधिक 62,500 (प्रति वर्ष) की हैजो पारंपरिक बोली से 72% अधिक है.

2.दिनांक 06.06.22 को गोरखपुर हवाई अड्डे के समीप मिश्रित पार्किंग के लिए ई-नीलामी आयोजित की गई, जिसमें उच्चतम प्राप्त बोली रु. 8,47,458 की है जबकि प्राक्कलित राशि रू.5,31,000/- थी. यह पारंपरिक बोली से 59.60% अधिक है.

3.पार्किंग स्थल-आनंद विहार टर्मिनल, अनुबंध अवधि-3वर्ष, प्राप्त कुल बोलियां-74, प्रस्तावित मूल्य

सालाना-75 लाख. कुल अर्जन -2.25 करोड़. प्राप्त प्रस्ताव पारंपरिक बोली मूल्य से 127.33% अधिक था.

 

नई प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:

नीलामी आईआरईपीएसके www.ireps.gov.in'ई-नीलामी लीजिंग' मॉड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी.

ई-नीलामी के लिए नीति और नीलामी की मानक शर्तें रेलवे बोर्ड द्वारा जारी की गयी: इससे पहले मंडल-वार ठेकेदारों के भौतिक पंजीकरण की प्रणाली को हटा दिया गया, केवल वित्तीय मानदंड - ठेकेदारों द्वारा पिछले टर्नओवर की स्व-घोषणा के आधार पर वित्तीय टर्नओवर मानदंड को युक्तिसंगत और मानकीकृत किया गया - 40 लाख रुपये तक के वार्षिक अनुबंध के लिए कोई टर्न ओवर की आवश्यकता नहीं है. ठेकेदारों का एक बार ऑनलाइन स्व-पंजीकरण. किसी भी मंडल की किसी भी नीलामी में भाग लेने के लिए कोई भौगोलिक प्रतिबंध नहीं है.

सभी परिसंपत्तियों की बेहतर निगरानी और अनुबंध अग्रिम रूप से जारी करना सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम में फीड किया जाएगा - संपत्ति की निष्क्रियता को कम होगी.

परिसंपत्ति के सभी विवरणों के साथ नीलामी सूची आईआरईपीएस पोर्टल पर कम से कम 15 दिन पहले ऑनलाइन प्रकाशित की जाएगी.

नीलामी ऑनलाइन आयोजित की जाएगी - बोलीदाता भारत में कहीं से भी भाग ले सकते हैं.

नीलामी के लिए कम से कम 30 मिनट का समय दिया जाएगा ताकि सभी इच्छुक ठेकेदार अपनी बोलियां प्रस्तुत कर सकें.

किसी भी कैटलॉग में लगातार लॉट्स की नीलामी 10 मिनट के अंतराल के बाद बंद कर दी जाएगी.

यदि नीलामी बंद होने के समय के अंतिम 2 मिनट के भीतर कोई बोली प्राप्त होती हैतो, लॉट के लिए समापन समय स्वतः 2 मिनट के लिए बढ़ जाएगा. सभी बोलीदाताओं को अपनी बोलियां प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करने के लिए ऐसे 10 ऑटो एक्सटेंशन की अनुमति दी जाएगी.

लॉट के आरक्षित मूल्य का खुलासा नहीं किया जाएगा और बोलीदाता अपने मूल्यांकन के अनुसार संपत्ति की वास्तविक व्यावसायिक क्षमता के अनुसार कोई भी बोली लगाने के लिए स्वतंत्र होंगे.

बोलियां स्वतः तय होंगी.

यदि उच्चतम बोली (एच1) आरक्षित मूल्य के बराबर या उससे अधिक है तो नीलामी बंद होने के बाद उसी दिन अनुबंध को अंतिम रूप दिया जाएगा.

बोली शीट और अनुबंध समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे.

अनुबंध के लिए भुगतान अनुसूची तुरंत तैयार की जाएगी.

ठेकेदार द्वारा सभी भुगतान ऑनलाइन किए जाएंगे.

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कागजरहित होगी.

 

 

लाभ:

1. ऑनलाइन प्रणाली द्वारा देश भर के दूर-दराज के संभावित बोलीदाता बोली प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं.

2. ठेका मिलने के बाद ही रेलवे को ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं. अभी तक पार्सल लीजिंग अनुबंध में दैनिक मैन्युअल भुगतान का प्रावधान है, जो एक लंबी प्रक्रिया है. अब इसे ऑनलाइन कर दिया गया है.

3. बेहतर निगरानी: मैपिंग के बाद, जब किसी विशेष परिसंपत्ति का अर्जन अनुबंध पूरा होने वाला होता है तो पोर्टल संकेत देता है और नई नीलामी शुरू करने के लिए बाध्य करता है, इस प्रकार संपत्ति का निष्क्रिय समय न्यूनतम हो जाता है.

4. अखिल भारतीय पात्रता शर्तों का मानकीकरण.

5. प्रक्रियाओं का सरलीकरण. निविदाओं को अंतिम रूप देने में लगने वाले समय को काफी कम कर देता है और इस कारण से होनेवाली राजस्व हानि को रोकता है.

6. किसी भी ठेकेदार की विफलता के मामले में अनुबंध को त्वरित पुन: प्रदान करना.

7. बोलीदाताओं के बीच कार्टेल को तोड़ता है. बोलीदाताओं की पहचान एक दूसरे से और भारतीय रेल से छिपाई जाएगी.

8. बोलीदाताओं के बीच उच्च प्रतिस्पर्धा के कारण संपत्ति की वास्तविक व्यावसायिक क्षमता प्राप्त करके राजस्व अर्जन में वृद्धि होगी.

9. परिसंपत्तियों की निष्क्रियता को कम करेगा, जिसके परिणामस्वरूप परिसंपत्तियों की क्षमता में संवृद्धि होगी.

10. 40 लाख रुपये तक के लिए कोई टर्न ओवर मानदंड की आवश्यकता नहीं होगी जिससे स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.





  प्रशासनिक लॉगिन | साईट मैप | हमसे संपर्क करें | आरटीआई | अस्वीकरण | नियम एवं शर्तें | गोपनीयता नीति Valid CSS! Valid XHTML 1.0 Strict

© 2010  सभी अधिकार सुरक्षित

यह भारतीय रेल के पोर्टल, एक के लिए एक एकल खिड़की सूचना और सेवाओं के लिए उपयोग की जा रही विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं द्वारा प्रदान के उद्देश्य से विकसित की है. इस पोर्टल में सामग्री विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं और विभागों क्रिस, रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा बनाए रखा का एक सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है.