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परिचयः

यह संगठन कर्षण पावर सप्लाई संस्थापन, ऊपरी उपस्कर , पर्यवेक्षकीय नियंत्रण तता डेटा एक्विजेशन सिस्टम से संबंधित है.


1.विजयवाडा से बल्हारशाह के बीच विद्युतीकरण का कार्य जुलाई 1987 से आरंभ हुआ और जून 1989 में पूरा हुआ. दूसरा विद्युतीकृत सेक्शन काजीपेट से सनतनगर दिसंबर 1991 में आरंभ हुआऔर दिसंबर 1993 में समाप्त हुआ. विद्युतीकरण का तीसरा स्तर 1996 में डोर्नकल- कारेपल्ली सिंगरेनी (एल्लंदु) के बीच हुआ. लिंगमपल्ली के लिए एमएमटीएस सेवाओं की सुविधा प्रदान करने के ले सनतनगर से लिंगमपल्ली तक विद्युतीकरण का चौथा स्तर 2003 के दौरान पूरा किया गया.बाद में 2008 में कारेपल्ली-भद्राचलम रोड–मणुगूरु सेक्शन को विद्युतीकृत किया गया. लिंगमपल्ली और वाड़ी के बीच विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है, जिसमें लिंगमपल्ली और तांडूर के बीच सेक्शन को विद्युतीकृत किया गया. इस मंडल में विद्युतीकृत मार्ग किलोमीटरेज 2200 रेलपथ किलोमीटर हो गयी है, जिसका मालभाड़े का संचलन व यात्री यातायात में महत्वपूर्ण योगदान है.

संगठनः
  • वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियरइस संगठन के प्रमुख हैं और उनकी सहायता के लिए डोर्नकल, काजीपेट,सिकपुर कागजनगर, सिकंदराबाद और तांडूर में उप-मंडलीय अधिकारीसहायक के रूप में हैं. इस मंडल में 17 ऊपरी अनुरक्षण (ऊपरी उपस्कर) डिपो हैं तथा 18 पावर सिस्टम संस्थापन (पीएसआई) डिपो/उप स्टेशन हैं. ऊपरी उपस्कर डिपो कर्षण संस्थापनों के निवारण अनुरक्षण अर्थात रेलपथ के ऊपर तारों से जहां से लोकोमोटिव पेंटोग्राफ करंट आरहित करने का कार्य करता है. पीएसआई डिपो रेलवे कर्षण उप स्टेशनों का रख-रखाव करते हैं जिसमें 25 कि.वा.ए.सी पावर के साथ ऊपरी उपस्कर को फीड किया जाता है.
  • पीएसआई तथा ऊपरी उपस्कर तिविधियों को कर्षण पावर नियंत्रक (टीपीसी) द्वारा मानीटर किया जाता है, जो सिस्टम की वोल्टता को मानीटर करता है और जब गाड़ियों के बंचिगं के कारण वोल्टता कम होता है तथा गाड़ियों की स्टॉलिंग होती है तब सेक्शन यातायात नियंत्रक को गाड़ियों को विनियित करने के लिए सूचित करता है.
  • कर्षणउप स्टेशनों और स्विचिंग स्टेशनों में उपस्कर को टीपीसी द्वारा रिमोट से नियंत्रित किया जाता है. रिमोट कंट्रोल उपस्कर की मानीटरी भी की जाती है.
 कार्यः

  • इस विभाग के कार्य हैं- कर्षण पावर सप्लाई संस्थापन, ऊपरी उपस्कर, एससीएडीए का अनुरक्षण, सेक्शन से संबंधित निर्माण कार्य और विद्युत कर्षण में ऊर्जा संरक्षण की मानीटरी करना.
  • विद्युत इंजनों की हॉलिंग के लिए आवश्यक ऊपरी उपस्कर के लिए पावर को फुल प्रूफ प्रोजेक्टिव उपस्कर के साथ रेलवे द्वारा अनुरक्षित 17 उप स्टेशनों से लिया जाता है. कर्षण के लिए अवरोधरहित पावर फीडिंग देने के लिए एक 100% स्टैंडबाई पावर सप्लाई की व्यवस्था की गई है. अधिक विश्वसनीयता के लिए 220/132 कि.वा पावर सप्लाई प्राधिकरण अर्थात एमएसईबी/ एपीट्रान्सको से रेलवे सप्लाई लेती है. 220/132 कि.वा. अब कम होकर 25 कि.वा हुआ है और ऊपरी उपस्कर के माध्यम से इंजनों को फीड किया जा रहा है.

महत्वपूर्ण पावर संस्थापनों की संख्या नीचे प्रस्तुत है

कर्षण उप स्टेशनों की सं

पावर ट्रान्सफार्मरों की सं.

132 कि.वा सीबी की सं.

25 कि.वा.

सीबी की सं

25 कि.वा बीएम की सं

132

कि.वा सीटी की सं

25 कि.वा सीटी की सं

25 कि.वा सीटी की सं

कि.वा एलए की सं

एटी की सं

आईसोलेटरों की सं

17

32

32

84

260

64

135

204

392

444

395


मंडल में निम्नानुसार ऊर्जा के उपयोग में वृद्दि हुई है.


वर्ष

ऊर्जा का उपयोग (मिलियन यूनिटों में)

2006-07

458.7

2007-08

498.4

2008-09

530.5

2009-10

562.6

2010-11

592.8

ऊपरी उपस्कर का निर्माण तकनीकी कौशल के आधार पर किया जाता है और 160 किमीप्रघं की इंजन की गति को पूरा करने के लिए अभिकल्पित किया जाता है.

नवीयन/सुधारः

  • सनतनगर/टीएसएस , काजीपेट/टीएसएस, बोनकालु/टीएसएस में मेन लाइनों से साइडिंगों में खराबी का पृथक्करण सुनिश्चित किया गया है. मोटुमारी, जग्गय्यपेट, माणिकगढ़, गढ़चंदूर साइडिंगों तथा काजीपेट, मौला अली के लोको शेडों में प्रोजेक्टिव रिले के साथ अतिरिक्त सर्किट ब्रेकरों की व्यवस्था करते हुए अलग आईसोलेशन व्यवस्था की गई है जो मेन लाइन पर रुकौनियों को कम करती है.

  • घोसले बनाने के मौसम में, सामान्यतया चिड़िया धातु के तारों का उपयोग करते हुएपोर्टल बूम पर घोसला बनाती हैं जिसके कारण ट्रिपिंग होती है. घोसला बनाने की संभावनावाले स्थानों में साधारण डरावनी चीजों को रखकर इन्हें नियंत्रित किया जाता है.

  • सभी लदान पाइंटों पर विद्युत इंजनों सहित ईओएल लदान के लिए ऊपरी उपस्कर में संशोधन किया गया है जिससे रेक का अनुकूलतम उपयोग किया जा सकता है.

  • मालडिब्बों में कोयले के ढ़ेर लगाने के कारण ऊपरी उपस्कर को ब्रेक डाउन हो जाता है इसके रोकथाम के लिए सभी कोयला लदान पाइंटों में लेवलरों को स्थापित किया गया है.

  • जंपरों के स्थान पर पीटी फ्यूज़ की व्यवस्थाः

पीटी के एचटी साइड में जंपर के बदले फ्यूज़ की व्यवस्था की गई. पीटी के आंतरिक खराबी के दौरान खराब पीटी से ऊपरी उपस्कर को फ्यूज़ पृथक करेगा. इस प्रकार ऊपरी उपस्कर का भूयोजन और उसके कारण यातायात की रुकौनी से बचा जा सकता है.


  • ऊर्जा संरक्षणः

ऊर्जा खपत के केवीएएच पर रेलवे की नवीनतम एपीट्रान्सको दर सूची आधारित है. अच्छे पावर फैक्टर का अनुरक्षण करने पर कम ऊर्जा प्रभार का भुगतान करना पड़ता है जिसके लिए यह मंडल 2400 केवीएआर क्षमतावाला एक स्टैटिक कैपेसिटर और पावर फैक्टर में कारगर सुधार के लिए कुछ मिनि बैंक लगा रहा है.

  • जीपीएस मैंपिंग के साथ कंप्यूटरीकृत करंट कनेक्शन और स्टैगर चेकिंग उपस्र (आलीवर जी) को ऊपरी उपस्कर में चिनगारी की जांच करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो इससे पूर्व पंरपरागत पद्धति में मौजूद तृटियों को निकालता है.

  • धर्मल इमेजों के जंपर कनेक्शनों को कनेक्शनों की मानीटरी करने के लिए निकाला गया है. क्यों कि उसे पावर ब्लाक स्थिति के नीचे वास्तविक रूप से जांच करना हमेशा व्यावहारिक नहीं है.


थ्रस्ट क्षेत्रः
  • ऊपरी उपस्कर की विश्वसनीयता में सुधार लाने के लिए उपलब्ध 567 किमी में से 35 किमी अल्यूमिनियम कैटनरी तार को बदला गया.
  • 165 नग में से 68 नग अल्यूमिनियम क्रास-फीडर तारों के स्थान पर अधिक विश्वस्त कापर क्रास फीडर तार लगाए गए हैं. शेष की योजाना की जारही है.
  • खराबी की संभावना वाले विचं प्रकार के ऑटो-टेंशनिंग उपकरणों को निकाल कर अधिक विश्वस्त संशोधित 3-पुली प्रकार के एटीडी लगाए गए और यह कार्य चालू वित्तीय वर्ष में पूरा करने की संभावना है.





Source : दक्षिण मध्‍य रेलवे CMS Team Last Reviewed on: 15-06-2021  


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