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संरक्षा

संरक्षा उद्देश्‍यः
संरक्षा संगठन अपनी बढ़ती हुई विश्‍वसनीयता और रेल प्रणाली की उपलब्‍धता में सामान्‍य उद्देश्‍य के अभियान का भागी होता है, जिससे सामाजिक स्‍वीकार्यता और संरक्षा के उचित व्‍यावहरिक स्‍तरों में लगातार सुधार होता रहा है.  ये दीर्घकाली विकास क मूल सिद्धांत है जिससे जोखिम को संतुलित बनाया जा सकता है.
शून्‍य जोखिम कभी नहीं होता है और संरक्षा संगठन का कार्य जोखिम के सहनीय स्‍तर को हासिल करने में रेलवे की मदद करना है.
परिचालन संरक्षाः 

रेलवे प्रचालन, सुरक्षित तैयारी एवं गाडियों को संरक्षापूर्ण चलाने से संबंधित नियमावली एवं गतिविधियों को परिभजित करने का एक सामान्‍य शब्‍द है.  इन गतिविधियों का रेलवे में कार्यबल के सदस्‍य द्वारा निवाहि किया जाता है और उनकी ड्यूटी सीधी तरह से गाडि़यों के संचालन से जुडी होती है. ऐसे सभी कर्मचारियों को विवेचनात्‍मक संरक्षा के कार्मिक माना जाता है.  ऐसे सभी कर्मचारी अपनी ड्यूटी करने में योग्‍य और सक्षम है इसे सुनिश्चित करने के लिए एक प्रबंधन प्रणाली उपलब्‍ध है.  रेलवे परिचालन कर्मचारियों द्वारा प्रयुक्‍त नियमों, क्रियाविधि और अनुदेशों को विकसित कर और उनमें बहुत सालों तक संशोधन कर और इस में, मेनलाइन रेल प्रणाली पर विच्‍छेद आपातकाल योजनारहित घटनाओं और निपटने के लिए सभी आवश्‍क व्‍यवस्‍था की गई है.  रेलवे परिचालन समुदाय में इस प्रकार की घटनाओं को असामान्‍य कार्यचालन माना जाता है.
संरक्षा संगठन के बारे में
कुंजुरू और सिकरी समितियों द्वारा गंभीर रेल दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर भारतीय रेलवे में संरक्षा संगठन का निर्माण हुआ.  प्रारंभ में यह संगठन, परिचालन विभाग के एक अंग के रूप में काम कर रहा था.  न्‍यायाधीश खन्‍ना समिति (रेलवे संरक्षा समीक्षा समिति) की सिफारिशों के आधार पर, रेल प्रचालन संरक्षा से संबंधित विभिन्‍न विभागों जैसे – परिचालन, इंजीनियरी, यांत्रिक, विद्युत तथा सिगनल व दूरसंचार विभागों से अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक विशाल संगठन का निर्माण किया गया.

संरक्षा संगठन के स्‍तर
भारतीय रेलवे में संरक्षा संगठन तीनों स्‍तरों पर अर्थात् रेलवे बोर्ड का सर्वोच्‍च स्‍तर, क्षेत्रीय रेलवे का मध्‍यम स्‍तर और मंडलों पर निम्‍न स्‍तर पर कार्य करता है. 

रेलवे बोर्ड स्‍तर पर विभिन्‍न विभागों से लिए गए अन्‍य अधिकारियों, निरीक्षकों युक्‍त निर्देशकों की मदद से सलाहकार, संरक्षा संगठन का नेतृत्‍व करता है. क्षेत्रीय स्‍तर पर संरक्षा से संबंधित अन्‍य विभागों के अधिकारियों, पर्यवेक्षी कर्मचारियों की मदद से मुख्‍य संरक्षा अधिकारी इस संगठन का नेतृत्‍व करता है. 

मंडल स्‍तर पर इस संगठन का नेतृत्‍व वरिष्‍ठ मंडल संरक्षा अधिकारी द्वारा किया जाता है. कुछ मंडलों में सहायक अधिकारी भी उपलब्‍ध हैं.  मंडल स्‍तर पर सहायता प्रदान करने के लिए सभी संबंधित विभागों के पर्यवेक्षी स्‍तर के कर्मचारियों से मदद ली जाती है. 


संरक्षा संगठन का विस्‍तृत विषय और कार्य:
 
*    रेल प्रचालन में संरक्षा से संबंधित मामलों को सुग्राही बनाना.

*    सभी संरक्षा मामलों का निरीक्षण करना 

*    संरक्षा से संबंधित संवेदनशीलता और सुभदेय को पहचानना.

*    संबंधित विभागों को कार्यनिर्वहण के लिए समर्थ बनाना
 
संरक्षा संगठन के द्वारा निम्‍नलिखित कार्य किये जाते हैं:
 
*    सामान्‍य और आकस्मिक निरीक्षणों और उत्‍कृष्‍ट जांचों के जरिए, सभी स्‍तरों पर रेल कर्मचारियों की संरक्षा संबं‍धी जागरूकता की लेखा परीक्षा लेना. गाड़ी प्रचालन में संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्‍न विभागों द्वारा दिए गए नियमों तथा प्रक्रियाओं  की उपलब्‍धतता तथा पर्याप्‍तता की जांच तथा विभिन्‍न स्‍तरों के कर्मचारियों द्वारा इसका अनुपालन भी इसमें शामिल है.    

*    दुर्घटनाओं की रिपोर्ट करना, रेल दुर्घटना की जांच का आयोन, दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाना और भविष्‍य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए उपायों की सिफारिश करना.

*    रेलवे पर अप्रिय दुर्घटना के लिए प्रभावी प्रतिसाद प्रदान करने के लिए आपदा प्रबंधन मंत्रणा का अनुवीक्षण और आपदा प्रबंधन गतिविधियों में राज्‍य सरकार और अन्‍य एजेंसियों से तालमेल बनाए रखना.
 
*    रेल डिब्‍बों और समपार फाटकों पर संरक्षा से संबंधित विषय पर जनता में जागरूकता पैदा करना.
*    बुलेटिन, पत्रिकाएं, पोस्‍टरों, कैलेंडरों आदि के प्रकाशन के जरिए रेल कर्मचारियों में जागरुकता पैदा करना और  
*    जो कर्मचारी रेल दुर्घटनाओं या अवांछित घटनाओं को रोकते हैं, उन रेल कर्मचारियों  नक़द पुरस्‍कार एवं अन्‍य योजनाओं से प्रोत्‍साहित करना.

*    गाड़ी दुर्घटना की जांचों के फलस्‍वरूप रेल संरक्षा समीक्षा समिति, आपदा प्रबंधन की उच्‍च स्‍तरीय समिति द्वारा की गई सिफारिशों के कार्यान्‍वयन पर अनुवर्ती कार्रवाई करना.

*    संरक्षा विकसित गाड़ी संचालन, दक्षिण मध्‍य रेलवे केक मिश्‍ंन क्षेत्रों में से एक है.  दक्षिण मध्‍य रेलवे "दुर्घटना रहित गाड़ी सेवाओं" के लिए वचनबद्ध है.  भारतीय रेली समष्टि संरक्षा योजना 2003-2013 में उल्लिखित उद्देश्‍य एवं लक्ष्‍यों के मद्दे नजर विभिन्‍न संरक्षा संबंधी कार्य तथज्ञ क्रियाकलापों की प्रगति का मॉनिटरिंग करना.
गाड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गए पायः   

    उपभोक्‍ताओं को विश्‍वसनीय एवं संरक्षापूर्ण सेवा उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से गाड़ी परिचालन विधियों से जुड़े हुए फील्‍ड कर्मचारियों में संरक्षा संबंधी चेतना को जागृत करने के लिए संरक्षा संगठन अधिक प्रयास कर रही है.  संभवनीय दुर्घटनाओं को कम करने के मंडल द्वारा संरक्षा का अत्‍यंत प्राथमिकता दी गई है.  इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए संरक्षा संगठन निरंतर विभिन्‍न कदम उठाते हुए विलक्षण भूमिका निभा रहा है जैसे –

1.    दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कर्मचारियों के बीच सजगता बढ़ाने के उद्देश्‍य से     अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा नियमित अंतराल में कई संरक्षा अभियान चलाये     जा रहे है.  अभियानों के दौरान अधिकारी तथा पर्यवेक्षक दिन और रात में भी     इंजनों और साथ ही गार्ड यानों में भी लंबी यात्रा करते हैं.  वे फील्‍ड में कार्यरत     कर्मचारियों से मिलते हैं तथा संरक्षा से संबंधित सूक्ष्‍म पहलुओं को भी समझाते     हैं. 2.    दुर्घटना रोकथाम के उपाय के रूप में रेल कर्मचारियों के बीच जागरुकता लाने के     लिए विभिन्‍न संवेदनशील संरक्षा विषयों पर कई संरक्षा संगोष्ठियों को आयोजित     किया गया.
3.    इन हाउस संरक्षा बुलेटिन प्रकाशित किये गए जिनमें संरक्षा संबंधी संवेदनशील     मदों पर विस्‍तृत रूप में चर्चा की गई.
4.    चौकीदार रहित समपार फाटकों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंध में आम     जनता में चेतना बढ़ाने के उद्देश्‍य से तथा सलाह देने एवं शिक्षित करने के लिए     विशेष अभियान चलाए गए. 

5.    चौकीदार रहित समपार फाटकों के पास पेट्रोल पंप औश्र गॉओं में समपार फाटको     के बारे में सड़क प्रयोक्‍ताओं के बीच प्रिंटेड हैंड आउट/पैम्‍फलेट बितरित किए गए.
6.    जनता को रेल संरक्षा विषयों पर जानकारी देने तथा शिक्षित करने के लिए     समाचार पत्रों में नियमित रूप से विज्ञापन दिए जाते हैं.
7.    रेल संरक्षा मदों पर इलैक्‍ट्रानिक मीडिया के साथ-साथ फिल्‍म थियेटरों में भी     विज्ञापन प्रदर्शित किए जा रहे हैं.    
    संरक्षा वि‍कसित गाड़ी संचालन, दक्षिण मध्‍य रेलवे के मिशन क्षेत्रों में से एक है.     दक्षिण मध्‍य रेलवे "दुर्घटना रहित गाड़ी सेवाओं" के लिए
   
    निम्‍नलिखित पूर्वोपायों को बरतते हुए इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में जनता हमारी     मदद कर सकती है जो क्षात्रियों को किसी भी दुर्घटना से बचाएगी.

आग दुर्घटनाए
1.     आग दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ज्‍वलनशील/दहनशील वस्‍तुओं जैसे पेट्रोल,     मिट्टी का तेल, डीजल, फिल्‍म, पटाखें, गैस सिलिंडर आदि को न ले जाएं.
2.     गाडि़यों में सिगरेट न जलाएं.  गाडि़यों तथा स्‍टेशनों में धूम्रपान निशिद्ध है.

3.     सवारी डिब्‍बो के मार्ग में भज्ञरी सामान रखते हुए मार्ग को अवरुद्ध न करें.
चौकीदार रहित समपार फाटकः

1.    चौकीदार रहित समपार फाटक पर पहुंचते समय सावधान रहें तथा गति को कम     करें. 2.    रोक बोर्ड के पास अपने वाहन को रोकें. 3.    ट्रैक की दोनों ओर व्‍यक्तिगत रूप से देखें या अपने सहायक वैसा करने को रहें. 4.    यदि किसी गाड़ी/ट्राली को फाटक पर पहुंचते हुए देखते हैं या किसी गाड़ी/ट्राली     के आने की आवाज़ को सुनते हैं तो सड़क को पार  करें.
5.    कभी भी रेल गाडी की गति का अनुमान न लगाएं. 6.    जब कोई गाड़ी/ट्राली न आ रही हो तभी सड़क पार करें. 7.    यदि आप चौकीदार सहित समपार फाटक को पार करने में लापरवाह हैं तो     आपको भारतीय रेल अधिनियम 1989 की धारा 160 के अनुसार एक वार्ड तक     कारावास होगा.

चौकीदार युक्‍त समपार फाटकः
1.    जब समपार फाटक बंद हो तब सड़क पार करने का प्रयत्‍न न करें. 2.    जब गाड़ी संचालन के लिए फाटक बंद हो तब फाटक खोलने के लिए फाटकवाले     को विवश न करें.

रन ओवर दुर्घटनाएः
1.    फुट बोर्ड पर यात्रा न करें.  आप गाड़ी को छोड़ सकते हैं आपका भविष्‍य नहीं. 2.    चलती गाडि़यों में न चढ़ें/न उतरें.




Source : दक्षिण मध्‍य रेलवे CMS Team Last Reviewed on: 10-05-2012  


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