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इतिहास

 

दक्षिण मध्य रेलवे का गठन 2 अक्तूबर 1966 को भारतीय रेलों पर 9वीं क्षेत्रीय रेलवे के रूप में हुआ था. अपनी चालीस वर्षों की वचनबद्ध सेवा और परोगामी प्रगति करते हुए दक्षिण मध्य रेलवे ने, यात्रियों/ग्राहकों की आकांक्षाओ को पूरा करते हुए भारी परिवहन की एक आधुनिक प्रणाली के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी है.

दक्षिण प्रायद्वीप में स्थित इस गतिशील संगठन का मुख्यालय सिकंदराबाद में है, जो आर्थिक रूप से उन्नत आंध्र प्रदेश राज्य, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के भागों को सेवा प्रदान करता है.

भाप इंजन से चलनेवाली गा़ड़ियों और लकड़ी की सीटों के जमाने से लेकर अब दक्षिण मध्य रेलवेने अधिक क्षमता वाले डीजल और विद्युत इंजऩ, उच्च गति टेलीस्कोपिक पैसेंजर डिब्बे और उच्चतर धुरा भार मालडिब्बों, सभी महत्वपूर्ण मार्गों में उच्च क्षमता के रेलपथ, सालिड स्टेट अंत:पार्शन युक्त बहु संकेती रंगीन सिगनल व्यवस्था व सूक्ष्मतरंग और डिजिटल संचार प्रणाली आदि अत्याधुनिक प्रणालियों को अपनाते हुए एक लंबी यात्रा पूरी की है.  

दक्षिण मध्य रेलवेने विगत वर्षों में अपने कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्रों को सेवा प्रदान करने के लिए काफ़ी अवसंरचात्मक विकास और प्रौद्योगिकीय उन्नयन करते हुए अपनी परिवहन क्षमता को काफ़ी बढ़ाया है. इस रेलवे ने गाड़ियों का सुरक्षित परिचालन, नेटवर्क विस्तारण, आधुनिक यात्री सुख-सुविधाएं, गाड़ियों का समय पालऩ, गाड़ियों और स्टेशनों में साफ-सफाई और नम्रतापूर्वक सेवा प्रदाने करने पर विशेष बल दिया है. सेवान्मुखी संगठन होने के नाते दक्षिण मध्य रेलवे ने 85 स्टेशनों/स्थलों पर 96%उपलब्ध शायिकाओं को शामिल करते हुए कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली सेवा उपलब्ध करायी है. रेल ग्राहको को सूचना उपलब्ध कराने के क्षेत्र जैसे आरक्षण और गाड़ी पूछताछ के लिए इंटर एक्टीव वायस रेस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) गाड़ियों के वास्तविक आवागमन की सही समय सूचना उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय गाड़ी पूछताछ प्रणाली, (एनटीईएस) स्थान की उपलब्धता और शायिका के पुष्टिकरण संबंधी सूचना के लिए यात्री परिचालित पूछताछ टर्मिनल (पीओईटी) और सभी महत्वपूर्ण स्टेशनों परआरक्षण की स्थिति की वास्तविक समय सूचना क लिए बंद सर्किट दूरदर्शन (सीसीटीवी) उपलब्ध कराए गए है. 

दक्षिण मध्य रेलवेपर माल की भारी ढुलाई के लिए उच्च अश्व शकि्त वाले डीजल और विद्युत इंजन और तेज़गति, उच्चतर धुरा भार वाले बक्स-एन-वैगन आरंभ किए गए है. आज दक्षिण प्राय: द्वीप में कृषि और औद्योगिक उन्नति में उत्प्रेरक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ दक्षिण मध्य रेलवेने अपने पोर्टों के माध्यम से आयात/निर्यात के लिए उनके बाहरी और भीतरी कंटेनर डिपो को बंदरगाहों से जोड़ने के साथ-साथ व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र को भी समृद्ध किया है.

समाज की निजी व्यापारिक, शैक्षिक और पर्यटन के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए कई सुपर फास्ट ओर इंटरसिटि
गाड़ियों को शुरू कर लंबी दूरी और कम दूरी की विश्वसनीय ओर आरामदेह यात्री सेवा उपलब्ध करायी जा रही है.

 

    दक्षिण मध्य रेलवे का गठन, दक्षिण रेलवे से विजयवाडा और हुबली मंडल तथा मध्य रेल से सिकंदराबाद और सोलापुर मंडल को मिलाकर 2अक्तूबर, 1966 को किया गया


    अक्तूबर 1977 में दक्षिण रेलवे के गुंतकल मंडल को दक्षिण मध्य रेलवे में विलयन करते हुए और सोलापुर मंडल को मध्य रेलवे में वापस अंतरित करते हुए आधिकारिक संमजन किए गए.

    प्रभावात्मक परिचालनिक नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए फरवरी, 1978 में सिकंदराबाद मंडल को दो मंडलों अर्थात् सिकंदराबाद और हैदराबादके रूप में विभाजित किया गया.

    दक्षिण मध्य रेलवे के नये गठित गुंटूर और नांदेड मंडलों में 1 अप्रैल, 2003 से कार्य आरंभ किया गया और हुबलीमंडल को नए गठित दक्षिण पश्चिम रेलवे में अंतरित किया गया. इस समय दक्षिण मध्य रेलवे पर छह मंडल विद्यमान है अर्थात्सिकंदराबाद, हैदराबाद, विजयवाडा, गुंटूर, गुंतकल और नांदेड, जिसकी लंबाई 5752 मार्ग कि.मी. है और इसमें से 1604 मार्ग कि.मी. को विद्यतीकृत किया गया है.

    दक्षिण मध्य रेलवे के गठन के पश्चात 342.805 मार्ग कि.मी. की नई लाइनें बिछाई गई, 2676.19 मार्ग कि.मी. को मी.ला. में परिवर्तित किया गया और 1272.453 मार्ग कि.मी. की रेलपथ का दोहरीकरण कार्य पूरा किया गया, कई नदियों पर बड़े-बड़े पुलों का निर्माण किया गया, जिसमें इंजीनियरी के अदभुत कार्य अर्थात् राजमंड्री में गोदावरी पुल और III गोदावरी पुल शामिल है.
    ग्राहक संतुष्टि की ओर 85 स्टेशनों/निर्धारित स्थानों पर कंप्टरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली संस्थापित की गई और यह देश में किसी भी स्टेशन पर किसी भी गाड़ी से आरक्षण उपलब्ध कराता है. माल परिचालन में दक्षता प्राप्त करने के लिए द.म.रे. ने अपने क्षेत्राधिकार में माल परिचालन सूचना प्रणाली (फाँयस) संस्थापित भी है और 23 स्टेशनों पर रैक मैनेजमेंट सिस्टम तथा 31 स्टेशनों पर टर्मिनल प्रबंधन प्रणाली आरंभ की है.

    यात्री और माल कार्य निष्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई है. माल लदान में, जो द.म.रे. के गठन अर्थात् वर्ष 1966 में केवल 9.00 मिलियन टन था, प्रमाणात्मक वृद्धि हुई और वित्तीय वर्ष 2003-04 में इसमें 44.79 मिलियन टन तक वृद्धि हुई. यात्री परिवहन में भी भारी वृद्धि हुई, जो वर्ष 2003-04 में 195.65 मिलियन रहा, जब कि द.म.रे. के गठन के वर्ष में यह संख्या 50 मिलियन थी और वर्ष 2003-04 में सकल अर्जन में 58.00 करोड़ रूपये से बढ़कर 3683 करोड़ रूपए तक की वृद्धि हुई.

    द.म.रे. ने उच्चाकांक्षों से युक्त यात्रा में कई कीर्तिमान स्थापित किए, जिसमें नेटनर्क विस्तारण, आधुनिकीकरण, उच्चतर कार्य निष्पादन तथा ग्राहक संतुष्टि आदि शामिल है, जो निम्न प्रकार है :-

    -
    रेल निलयम, सिकंदराबाद, एक ऐतिहासिक भवन है, जो द.म.रे. का क्षेत्रीय मुख्यालय कार्यालय है. वर्ष 1968 में निचली मंजिल से तीसरी मंजिल तक उद्-घाटन किया गया था और इसे वर्ष 1972 में पूर्णत:पूरा किया गया.
    -
    मालडिब्बा कारखाना गुंटपल्लीका उद्-घाटन 1974 में किया गया था.
    - II
    गोगावरी रेल एंव सड़क पुल को महामहिम श्री फक्रुद्दीन अली अहमद द्वारा दिनाँक 20-11-1974 को आरंभ किया गया था.
    -
    मशीन से रेलपथ बिछाये जाने की पहली प्लासर क्विक रिलेइंग प्रणाली (पीक्यूआरएस) वर्ष 1975 में आरंभ की गई.

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    जनवरी 1976 में, विजयवाडा स्टेशन पर दक्षिण मध्य रेलवे की पहली रूट रिले अंतःपाशन (आरआरआई) प्रणाली आरंभ की गई.
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    हैदराबाद- नई दिल्ली आंध्र प्रदेश (सुपर फास्ट) एक्सप्रेस, दिनांक 03-10-1976 को आरंभ की गयी.
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    अक्टू्बर, 1979 में भारतीय रेलों पर सबसे पहला माइक्रोवेव लैब दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद में आरंभ किया गया.

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    100 विद्युत इंजनों की अनुरक्षण क्षमता से युक्त विद्युत लोको शेड, विजयवाडा का उद्-घाटन 1980, अप्रैल में किया गया.

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    संचालन भवन, जो दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद मंडल का मुख्यालय है, का उद्-घाटन 10.11.1980 को माननीय उप रेलमंत्री, श्री मल्लिकार्जुन द्वारा किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर विजयवाडा से गुडूर तक के पहले विद्यतीकृत मार्ग का उद्-घाटन 15 सितंबर, 1980 को किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे में सबसे पहले टाई टांपिंग मशीन, वर्ष 1981, जनवरी में आरंभ की गई.

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    गुत्ती और धर्मवरम के बीच अतिरिक्त तौर पर बिछाई गई बड़ी लाइन को दि. 26-1-1983 को यातायात के लिए खोला गया.
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    100 ब.ला. सवारी डिब्बों की ओवर हालिंग क्षमता से युक्त सवारी डिब्बा मरम्मत कारखाना/तिरूपति को सितंबर 1985 में आरंभ किया गया.

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    बीबीनगर-नडिकुडि के बीच अतिरिक्त तौर पर बिछायी गई ब.ला. रेलवे लाइन को तीन चरणों में अर्थात् वर्ष 1987 में, वर्ष नवंबर 1988 में और अप्रैल 1989 में यातायात के लिए खोला गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर रेल निलयम/सिकंदराबाद में सर्वप्रथम डिजिटल इलेक्ट्रानिक एक्सचेंज का उद्-घाटन जुलाई 1988 में किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे ने 30.9.1989 को सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) आरंभ की.
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    दक्षिण मध्य रेलवे पर मई, 1990 में बलास्ट सफाई मशीन आरंभ की.

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    जुलाई, 1994 में दक्षिण मध्य रेलवे के कावली स्टेशन पर पहला सालिड स्टेट अंतःपाशन (इलेक्ट्रानिक अंतःपाशन प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है) आरंभ किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे ने यात्री परिवहन के लिए मई, 1995 में 5000 हार्स पावर क्षमता वाले विद्युत इंजन आरंभ किए.

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    100 विद्युत इंजनों के अनुरक्षण की क्षमता से युक्त विद्युत लोको शेड, साऊथ लालागुडा का उद्-घाटन सितंबर, 1995 में किया गया.

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    आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस को 30-11-1995 से 24 सवारीडिब्बों तक संवर्द्धितकर अनुवर्तन में चारमीनार एक्सप्रेस, गोदावरी एक्सप्रेस, पिनाकिनी एक्सप्रेस को भी संवर्द्धितकिया गया.

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    द.म.रेलवे द्वारा मई, 1996 में मैंगो स्पेशल (आम भार से युक्त माल गाडि़यां) गाडि़यां सबसे पहले आरंभ की गईं.

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    द. म. रेलवे पर विजयवाडा और मचिलीपट्टणम के बीच पहली डीज़ल मल्टीपल यूनिट (डी एम यू) सेवा का उद्-घाटन 01-9-1996 को किया गया.

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    द.म.रेलवे पर प्रथम मेन लाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमु) सेवा, 1 सितंबर, 1996 को विजयवाडा और ओंगोल के बीच आरंभ की गई.

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    सितंबर 1996 में विजयवाडा-गूडूर-रेणिगुंटा के बीच दक्षिण मध्य रेलवे की पहली लांग हाल डिजिटल माइक्रोवेव लिंक आरंभ की गई.

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    राजमंड्री में III गोदावरी पुल (बो स्ट्रिंग कंक्रीट संरचना) को 11.03.1997 में आरंभ किया गया.

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    सिकंदराबाद के कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली को दि. 14-10-1997 को नई दिल्ली की यात्री आरक्षण प्रणाली (पी आर एस) के साथ संबद्ध किया गया.

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    आरक्षण और गाड़ी में आवास के पुष्टिकरण संबंधी सूचना प्राप्त करने के लिए 12 लाइनों से युक्त इंटर एक्टीव वाइस रेस्पांस सिस्टम (आई वी आर एस) को 31 मार्च, 1998 को सिकंदराबाद में यात्री आरक्षण प्रणाली कार्यालय में सबसे पहले आरंभ किया गया था और बाद में इसे 60 लाइनों तक विस्तारित किया गया.अगस्त, 2004 तक 27 स्टेशनों में आई. वी. आर. एस. की व्यवस्था की गई.

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    मार्च,1998 में दक्षिण मध्य रेलवे पर रेलनेट आरंभ किया गया था.

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    अप्रैल, 1998 में पहले मोबाइल पुलिस स्टेशन, हैदराबाद-तिरुपति-नारायणाद्रि एक्सप्रेस से आरंभ किया गया था.

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    कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली, सिकंदराबाद को, दिनांक 19.7.1998 को, यात्री आरक्षण प्रणाली/हावड़ा के साथ संबद्ध किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे ने जुलाई, 1998 में माल परिवहन के लिए 5000 हार्स पावर क्षमता वाले विद्युत इंजन को आरंभ किए है.

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    कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली, सिकंदराबाद को दि.31.1.1999 को यात्री आरक्षण प्रणाली/मुंबई (सीएसटी) के साथ संबद्ध किया गया.

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    मालडिब्बा कारखाना, गुंटुपल्ली, विजयवाडा को मार्च, 1999 में आई एस ओ 9002 प्रमाणपत्र दिया गया.

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    सवारीडिब्बा कारखाना, तिरुपति को मई, 1999 में आई एस ओ 9002 प्रमाणपत्र दिया गया.

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    सिकंदराबाद की कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली को 18.4.1999 में यात्री आरक्षण प्रणाली/ चेन्नई के साथ संबद्ध किया गया.

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    सिकंदराबाद स्टेशन में दिनांक 31.12.1999 को यात्री परिचालित पूछताछ टर्मिनल (पी ओ ई टी) आरंभ किया गया तथा इसे जुलाई, 2004 में 49 स्टेशनों तक विस्तारित किया गया.

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    सिकंदराबाद में दिनांक 30.06.1999 को राष्ट्रीय गाड़ी पूछताछ प्रणाली (एन टी ई एस) आरंभ की गई थी और इसे जुलाई, 2004 में 11 स्टेशनों तक विस्तारित किया गया.

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    वर्ष 1999 में दक्षिण मध्य रेलवे पर ड्राइवर-गार्ड-स्टेशन प्रबंधक के बीच संसूचना की व्यवस्था के लिए वॉकी-टॉकी वायरलेस सेट आरंभ किया गया.

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    4000 हॉर्स पावर युक्त उच्च पॉवर डीज़ल इंजनों को वर्ष 1999 से माल गाडि़यों को ढ़ोने के लिए उपयोग में लाया गया था.

    - दक्षिण मध्य रेलवे पर पहला सौर्य शक्तियुक्त रंगीन बत्ती सिगनलों की व्यवस्था, जनवरी, 2000 में विजयवाडा मंडल के गुडिवाडा स्टेशन के पास समपार फाटक सं.55 पर की गई.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर पहले एल ई डी ज्वलित रंगीन बत्ती सिगनलों की व्यवस्था, जनवरी, 2000 में विजयवाडा-विशाखापट्टणम पर स्थित कडियम-द्वारपूडि स्टेशन के बीच 589/14-16 कि.मी. की दूरी पर स्थित समपार 404 पर की गई.

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    अप्रैल 2000 में सवारी डिब्बा कारखाना, लालागुडा, सिकंदराबाद को आई एस ओ 9002 प्रमाणीकरण दिया गया.

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    विजयवाडा स्टेशन पर अप्रैल 2000 में प्लैटफार्म तक पहुंचने वाले ऊपरी पुल पर चढ़ने के लिए एस्कलेटर आरंभ किया गया.

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    वर्ष 2001 में पैसेंजर गाडि़यों की ढुलाई के लिए 4000 हार्स पावर क्षमता वाला अत्याधुनिक उच्च शक्ति वाला ड़ीजल इंजन आरंभ किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर जनवरी 2001 में मालभाड़ा परिचालन सूचना प्रणाली (एफ ओ आई एस) के लिए उच्च गति (हाई स्पीड) डाटा चैनल नेट वर्किंग आरंभ की गई.

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    31 जून 2001 को सबसे पहले कोचिंग धनवापसी का कंप्यूटरीकरण हैदराबाद-नरसापुर एक्सप्रेस के लिए किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे में आल लाइट इमिटिंग डिमोड (LED) प्रकाशित सी एल एस के साथ जनवरी 2002 में आरंभ पहला स्टेशन कोव्वूर है.

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    दि. 12-02-2002 को सिकंदराबाद-नई दिल्ली राजधानी (सुपर फास्ट) एक्सप्रेस आरंभ की गई.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर दि.16-11-02 को ड्राइवर के वातानुकूलित कैबिन वाला पहले डीज़ल इंजन आरंभ किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे के गुत्ती और रेणिगुंटा स्टेशनों पर दि. 06-9-2002 को रेकों और माल डिब्बों के संचलन को मानिटर करने के लिए पहली बार रेक प्रबंधन प्रणाली (मालभाड़ा परिचालन सूचना प्रणाली का एक प्रभाग) आरंभ की गई जिसे बाद में जुलाई 2004 तक 23 स्थलों पर भी आरंभ किया गया.

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    वर्ष 2003 में गुंतकल मंडल के रेणिगुंटा-गुंतकल मार्ग पर चल रहे इंजनों पर प्रयोग के रूप में टक्कर रोधी साधन लगाए गए.

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    दक्षिण मध्य रेलवे के सभी महत्वपूर्ण मार्गों पर आप्टिक फाइबर केबल को बिछाने का कार्य रेलटेल कार्पोरेशन द्वारा दि.30.6.2003 तक पूरा किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा जुलाई और अगस्त में गोदावरी पुष्करण के लिए 707 विशेष गाडि़यां चलाई गईं जिनसे 22,84,170 तीर्थ यात्रियों को ले जाया गया और 4.28 करोड़ रुपए का अर्जन हुआ.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर पहला इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (ई एम यू) अगस्त 2003 में सिकंदराबाद और लिंगमपल्ली के बीच आरंभ किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे का पहला आई एस डी एन कम्पैटिबल इलेक्ट्रानिक एक्सचेंज मार्च 2003 में सिकंदराबाद में आरंभ किया गया.

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    दि.9.8.2003 को सिकंदराबाद-लिंगमपल्ली के बीच मल्टी मॉडल परिवहन प्रणाली गाड़ी (एम एम टी एस गाड़ी) सेवा आरंभ की गई.

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    दक्षिण मध्य रेलवे पर पहले दि.30.9.2003 को बेल्लमपल्ली स्टेशन पर टर्मिनल प्रबंधन प्रणाली, मालभाड़ा परिचालन सूचना प्रणाली (एफ ओ आई एस) का एक प्रभाग, आरंभ किया गया और उसके बाद जुलाई 2004 तक इसे 31 स्थलों पर भी आरंभ किया गया.

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    दि. 04.10.2003 को बेल्लमपल्ली स्टेशन पर पहले मालभाड़े की बुकिंग (टर्मिनल प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत) हेतु रेलवे रसीदको कंप्यूटरीकृत किया गया और बाद में जुलाई, 2004 तक इसे 9 स्टेशनों पर भी आरंभ किया गया.

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    जनवरी 2004 में दक्षिण मध्य रेलवे के विजयवाडा-विशाखपट्टणम मार्ग पर भीमडोलु-पूल्ला ब्लाक सेक्शन पर भारतीय रेलों पर सबसे पहले डिजिटल एक्सल काउंटर सिस्टम द्वारा "ब्लाक प्रूविंग" को ऊर्जित किया गया.

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    दि.14.2.2004 को सिकंदराबाद-फलकनुमा के बीच मल्टी मॉडल परिवहन प्रणाली (एमएमटीएस) का उद्-घाटन किया गया.

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    16 मार्च 2004 को मुख्य भंडार नियंत्रक कार्यालय, रेल निलयम, सिकंदराबाद के सिगनल, दूरसंचार, कैरेज, भंडार वित्त और भंडार बिल्स स्कंध को आई एस ओ 9001/2000 प्रमाण पत्र प्रदान किए गए.

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    18 मार्च 2004 को वरिष्ठ मंडल वित्त सलाहकार कार्यालय को आई एस ओ 9002 /2000 प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए.

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    दि.3.4.2004 को बंगलूरु-गुवाहाटी एक्सप्रेस गाड़ी विजयवाडा और गुवाहाटी के बीच पहली रेफ्रीजरेटेड पार्सल वैन सेवा आरंभ की गई.

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    मई 2004 माह के दौरान दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा 1.71 लाख बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों से 2.18 करोड़ रुपए का उच्चतम अर्जन वसूल किया गया.

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    वित्तीय वर्ष 2003-2004 में दक्षिण मध्य रेलवे को उसके सर्वोत्कृष्ट कार्यनिष्पादन के लिए रेल मंत्रालय द्वारा दो लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया गया.

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    जुलाई 2004 को दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा 85 स्टेशनों/स्थलों पर कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली स्थापित की गई जिससे द.म.रेलवे पर उपलब्ध 96% बर्थ कवर किए जा सके.

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    दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा वर्ष 1966 में अपने गठन से लेकर जुलाई 2004 तक 342.805 कि.मी. नई लाइनें बिछाई गई.

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    दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा वर्ष 1966 में अपने गठन से लेकर जुलाई, 2004 तक 2796.19 कि.मी. मीटर लाइन रेलपथ को बड़ी लाइन में परिवर्तित किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा वर्ष 1966 में अपने गठन से लेकर जुलाई 2004 तक 1272.453 कि.मी. रेलपथ का दोहरीकरण कार्य किया गया.

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    दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा वर्ष 1966 में अपने गठन से लेकर जुलाई 2004 तक 1706 मार्ग कि.मी. का विद्युतीकरण कार्य किया गया.



     

    सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन भवन

    सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन भवन का निर्माण वर्ष 1874 में निज़ाम गारंटीड राज्य रेलवे के अधीन हुआ था. इस भवन का विस्तारण कई बार हुआ.इसका प्रवेश द्वार और कॉनकॉर्स आज भी आसफ जाही वास्तुकला का नमूना प्रस्तुत करते हैं.भवन के दोनों ओर और पहली मंजिल का निर्माण कार्य दक्षिण मध्य रेलवे के नेतृत्व में पिछले 30 वर्षों में पूरा हुआ.

    यह किलानुमा संरचना हैदराबाद-सिकंदराबाद नगरद्वय का एक पर्यटन आकर्षण है.आज इस स्टेशन पर सभी आधुनिक सुविधाएं जैसे चौड़े प्लैटफार्म, प्रतीक्षा हाल, विश्रामालय, तीन ऊपरी पैदल पुल आदि हैं और यहां से प्रतिदिन 30,000 यात्रियों का आना जाना होता है.

    काचीगुडा स्टेशन भवन 

    काचीगुडा स्टेशन वास्तुकला की दृष्टि से दक्षिण मध्य रेलवे की सबसे रमणीय संरचना है.वर्ष 1916 में हैदराबाद राज्य के निज़ाम द्वारा निर्मित यह स्टेशन, निज़ाम राज्य गैरंटीड रेलवे का मुख्यालय था.इस स्टेशन के बीच और दोनों ओर गुम्बद है और साथ ही मीनारें सुशोभित हैं.


    यह वास्तुकला की गॉथिक शैली का अद्भुत नमूना है.किसी महाराजा के महल जैसा बुलंद काचीगुडा स्टेशन हैदराबाद शहर का महत्वपूर्ण कीर्तिमान है.कई आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस यह स्टेशन औरंगाबाद, तिरुपति आदि को जाने वाली गाडि़यों की सम्हलाई करने के साथ दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद मंडल का मुख्यालय स्टेशन भी है.  

    तीसरा गोदावरी रेल पुल 

    पहले गोदावरी पुल का निर्माण वर्ष 1897 में सर वाल्टन, ब्रिटिश इंजीनियर के पर्यवेक्षणाधीन राजमंड्री के निकट गोदावरी नदी पर किया गया था.तीन किलोमीटर तक फैला यह पुल पत्थर और स्टील गर्डरों से निर्मित है और इस पर से चेन्नै-हावडा और हैदराबाद-हावड़ा की ओर जानेवाली गाड़ियां गुजरती हैं.चूंकि इस पुल की सेवाएं 100 वर्षों से अधिक समय तक ली गईं, जो इसकी सेवा अवधि से अधिक है, अतः इस पर वर्ष 1997 से गाड़ी सेवाएं रोक दी गई और आज, पहला गोदावरी पुल मानव के उद्यम और कारीगरी का कीर्ति स्तम्भ है. 

    दोराबावी सेतु 

    नंद्याल-गिद्दलूर सेक्शन पर स्थित दोराबावी सेतु दक्षिण मध्य रेलवे की इंजीनियरी का एक और कीर्तिमान है.आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र के नल्लमला पहाडि़यों पर निर्मित इस सेतु का प्रशांत जंगलनुमा माहौल (छटा) इसे एक मनमोहक पिकनिक स्पॉट बना देता है.इस सेतु को वर्ष 1887 में मीटर लाइन यातायात के लिए खोला गया था.नंद्याल और गिद्दलूर के बीच गेज परिवर्तन के कारण एक वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के चलते अब इस सेतु को उपयोग में नहीं लाया जा रहा है.




    Source : दक्षिण मध्‍य रेलवे CMS Team Last Reviewed on: 02-12-2015  


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